"छत्तीसगढ़ में पुलिस की दरिंदगी: दो नाबालिग बच्चियों से करवाई मजदूरी, दी यातनाएं"

बिलासपुर में दो नाबालिग बच्चियों से पुलिसकर्मियों ने जबरन मजदूरी कराई और प्रताड़ित किया। आरोपी कांस्टेबल हैं।Two minor girls were forced into labor and tortured by policemen in Bilaspur, Chhattisgarh. The accused are constables.
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"छत्तीसगढ़ में पुलिस की दरिंदगी: दो नाबालिग बच्चियों से करवाई मजदूरी, दी यातनाएं"

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर दो नाबालिग बच्चियों से बंधुआ मजदूरी करवाने और उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप है। यह मामला जशपुर जिले की दो मासूम बच्चियों से जुड़ा है, जिन्हें पढ़ाई का लालच देकर बिलासपुर लाया गया था। लेकिन यहां उनका भविष्य संवारने की बजाय उन्हें पुलिस क्वार्टर में नौकरानी की तरह काम पर लगा दिया गया।

इन बच्चियों से जबरदस्ती पूरे घर का काम करवाया गया। काम न करने पर उन्हें डराया-धमकाया गया और मारपीट तक की गई। यह सारा अमानवीय व्यवहार कानून के रखवालों द्वारा किया गया, जो न केवल नैतिकता बल्कि मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।

इस अत्याचार से तंग आकर रविवार की रात दोनों बच्चियाँ किसी तरह वहाँ से भागने में सफल हुईं। इसके बाद उन्हें सुरक्षित "सखी सेंटर" में रखा गया है, जहाँ उनकी काउंसलिंग और देखभाल की जा रही है। जांच में यह सामने आया है कि जिन पुलिसकर्मियों ने बच्चियों को बंधक बनाकर मजदूरी करवाई, वे दोनों कांस्टेबल थे और मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है।

यह घटना पुलिस व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करती है। जिनके ऊपर जनता की सुरक्षा का जिम्मा होता है, अगर वही अपराध में लिप्त पाए जाएं तो भरोसे की नींव ही हिल जाती है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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