दंतेवाड़ा में बन रही कोल्ड स्टोरेज की आधुनिक सुविधा, आदिवासी गांवों की तरक्की को मिलेगी नई रफ्तार

Modern cold storage facility is being built in Dantewada, the development of tribal villages will get a new momentum दंतेवाड़ा में बन रही कोल्ड स्टोरेज की आधुनिक सुविधा, आदिवासी गांवों की तरक्की को मिलेगी नई रफ्तार

Jun 18, 2025 - 10:51
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दंतेवाड़ा में बन रही कोल्ड स्टोरेज की आधुनिक सुविधा, आदिवासी गांवों की तरक्की को मिलेगी नई रफ्तार

दंतेवाड़ा में बन रही कोल्ड स्टोरेज की आधुनिक सुविधा, आदिवासी गांवों की तरक्की को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, 17 जून 2025। बस्तर संभाग के किसानों और वनोपज संग्राहकों के लिए एक बड़ी सौगात तैयार हो रही है। दंतेवाड़ा जिले के पातररास गांव में एक अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग सुविधा की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना के तहत खेती और वनों से प्राप्त उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने की व्यवस्था की जा रही है।

यह सुविधा प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत बन रही है और पूरे देश में सरकारी स्तर पर अपनी तरह की पहली परियोजना होगी। इसके शुरू होने से बस्तर की तस्वीर बदलने की उम्मीद है और आदिवासी इलाकों की आर्थिकी को नई दिशा मिलेगी।

कोल्ड स्टोरेज से अब नहीं होगी उपज बर्बाद, आमदनी में होगा इजाफा

बस्तर में इमली, महुआ, जंगली आम, देशी मसाले और मोटे अनाज जैसी उपज काफी होती है। अब तक इन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था न होने से 7 से 20 फीसदी उपज हर साल खराब हो जाती थी। लेकिन इस सुविधा के शुरू होने से कोल्ड स्टोरेज, फ्रीजर, रेडिएशन मशीन और बड़े ट्रकों की मदद से उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे बर्बादी रुकेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा।

परियोजना की खास बातें

लागत : ₹25 करोड़

संचालन : जिला परियोजना आजीविका कॉलेज सोसायटी

क्षमता :

1500 मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज

1000 मीट्रिक टन का फ्रोजन स्टोरेज

5 छोटे कोल्ड रूम

ब्लास्ट फ्रीजर और अलग-अलग चैंबर

रेडिएशन मशीन

सामान ढोने के लिए 3 बड़े ट्रक

70 किलोवॉट सौर ऊर्जा संयंत्र

इस सुविधा से हर साल 10,000 मीट्रिक टन से ज्यादा उपज को सुरक्षित रखा जा सकेगा। दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और नारायणपुर के किसान और वनोपज संग्राहक भी इसका लाभ उठा सकेंगे।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

इस परियोजना से हर साल लगभग ₹8.5 करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद क्षेत्र में रोजगार और आय के साधन बढ़ेंगे, जिससे वामपंथ प्रभावित इलाकों में शांति और स्थायित्व को भी बल मिलेगा।

बाजार भी तैयार, बस्तर के नाम से बनेगा ब्रांड

परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध हो गई है और रेडिएशन तकनीक देने वाली संस्था बीआरआईटी से समझौता भी हो चुका है। अगले 24 महीनों में यह सुविधा पूरी तरह चालू हो जाएगी। वहीं रायपुर और विशाखापट्टनम में उपज के लिए बड़े बाजार भी तैयार कर लिए गए हैं। खास बात यह है कि ‘बस्तर’ के नाम से ब्रांडिंग की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि यहां के उत्पादों को देश और दुनिया में पहचान मिले और किसानों को ज्यादा दाम मिल सके।

सरकार की पहल, आदिवासी समाज को नई पहचान

प्रदेश सरकार का कहना है कि यह महज एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के भविष्य की नींव है। इससे बस्तर में खेती, वनोपज और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना साबित करेगी कि जब नीति, संसाधन और स्थानीय लोगों की मेहनत एकसाथ जुड़ती है, तो गांव की अर्थव्यवस्था भी चमक सकती है।

यह मॉडल दूसरे आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी मिसाल बनेगा, जहां जनजातीय समुदायों को उनका हक और सम्मान दोनों मिल सके।

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