पश्चिम बंगाल में सड़क पर नमाज़ को लेकर सियासत तेज, भाजपा सरकार के फैसले पर बढ़ी चर्चा
पश्चिम बंगाल में सड़क पर नमाज़ को लेकर सियासत तेज, भाजपा सरकार के फैसले पर बढ़ी चर्चा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ को लेकर बहस तेज हो गई है। राज्य में भाजपा नेतृत्व के सत्ता में आने के बाद प्रशासनिक सख्ती और कानून व्यवस्था को लेकर कई बड़े बयान सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि किसी भी स्थिति में आम लोगों का रास्ता बाधित नहीं होने दिया जाएगा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में सभी नागरिकों को अपने धार्मिक कार्य करने की स्वतंत्रता है, लेकिन सड़कें जाम कर आम जनता को परेशान करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार “कानून सबके लिए समान” के सिद्धांत पर कार्य करेगी और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम लागू किए जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में हुए हालिया चुनावों के बाद राज्य की राजनीति हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के केंद्र में आ गई है। भाजपा नेताओं का दावा है कि हिंदू मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर भाजपा का समर्थन किया, जबकि मुस्लिम वोट बैंक का झुकाव तृणमूल कांग्रेस की ओर रहा। इसी कारण अब राज्य की नई सरकार कानून व्यवस्था और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि वर्षों से कई इलाकों में सड़कों पर नमाज़ के कारण यातायात प्रभावित होता रहा है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब सरकार इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में कदम उठा रही है। वहीं विपक्षी दलों ने इस बयान और फैसले को राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़ते हुए सरकार पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है।
राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस संबंध में क्या दिशा-निर्देश जारी करता है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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