मारुति लाइफस्टाइल सोसायटी ने तहसीलदार के आदेश पर उठाए सवाल, 350 परिवारों की सुरक्षा का दिया हवाला

Maruti Lifestyle Society questions safety of 350 families, orders issued for safety of 350 families
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मारुति लाइफस्टाइल सोसायटी ने तहसीलदार के आदेश पर उठाए सवाल, 350 परिवारों की सुरक्षा का दिया हवाला

मारुति लाइफस्टाइल सोसायटी ने तहसीलदार के आदेश पर उठाए सवाल, 350 परिवारों की सुरक्षा का दिया हवाला

रायपुर। राजधानी रायपुर के महोबा बाजार स्थित मारुति लाइफस्टाइल रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी और प्रशासन के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। सोसायटी की ओर से अतिरिक्त तहसीलदार राकेश देवांगन रायपुर को पत्र लिखकर 12 मई 2026 को जारी उस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई है, जिसमें कॉलोनी के भीतर बन रहे अतिरिक्त गार्ड रूम के निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए थे।

सोसायटी ने अपने पत्र में दावा किया है कि यह निर्माण किसी अवैध गतिविधि के तहत नहीं बल्कि कॉलोनी में रहने वाले करीब 350 परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा था। पत्र में कहा गया है कि निर्माण प्रस्ताव को 22 फरवरी 2026 को आयोजित गवर्निंग बॉडी की बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

सोसायटी प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि शिकायतकर्ता शशांक अग्रवाल द्वारा की गई शिकायत के आधार पर बिना सोसायटी का पक्ष सुने आदेश जारी कर दिया गया। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता ने इससे पहले न तो लिखित और न ही मौखिक रूप से सोसायटी के समक्ष कोई आपत्ति दर्ज कराई थी।

सोसायटी ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आदेश जारी करने से पहले न तो सोसायटी को जांच में शामिल किया गया और न ही कोई पूर्व नोटिस दिया गया। प्रबंधन का कहना है कि इससे चुनी हुई समिति और आवासीय सोसायटी के अधिकारों का हनन हुआ है।

पत्र में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2019 में कॉलोनी का संचालन विधिवत रूप से मारुति लाइफस्टाइल रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी को हस्तांतरित किया गया था और तब से कॉलोनी की सुरक्षा, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं का जिम्मा सोसायटी के पास है।

सोसायटी ने अतिरिक्त तहसीलदार राकेश देवांगन से आदेश पर पुनर्विचार करने और आगामी सुनवाई में सोसायटी को विधिवत पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई तो मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाया जा सकता

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