रेवड़ियों का बढ़ता बोझ: राज्यों पर कर्ज का पहाड़, शिक्षा-राशन बजट में कटौती
रेवड़ियों का बढ़ता बोझ: राज्यों पर कर्ज का पहाड़, शिक्षा-राशन बजट में कटौती
मप्र, तेलंगाना, पंजाब समेत कई राज्यों में फ्री योजनाओं का दबाव; महाराष्ट्र में ‘शिव थाली’ तक का बजट घटाना पड़ा
चुनावी वादों के तहत दी जा रही मुफ्त योजनाएं अब राज्यों की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने लगी हैं। फ्री राशन, महिलाओं को नकद सहायता और बिजली सब्सिडी जैसी योजनाओं का बोझ इतना बढ़ गया है कि कई राज्य संतुलित बजट बनाने में असमर्थ हो रहे हैं।
स्थिति यह है कि कुछ राज्यों में इन योजनाओं पर खर्च कुल राजस्व का 30 से 40% तक पहुंच गया है, जिससे शिक्षा, सड़क, पानी और राशन जैसे जरूरी क्षेत्रों के बजट में कटौती करनी पड़ रही है।
छोटे राज्यों में गंभीर संकट
हिमाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं।
नकदी संकट के चलते मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के वेतन-पेंशन तक टालने पड़े
बजट में ₹3,586 करोड़ की कटौती
कुल कर्ज ₹1 लाख करोड़ के पार
बड़े राज्यों का भी बिगड़ता संतुलन
मध्य प्रदेश: ‘लाडली बहना’ योजना के कारण कर्ज जीएसडीपी के मुकाबले 27% से बढ़कर 32%
महाराष्ट्र: ‘लाडकी बहिन’ योजना के दबाव में ‘शिव थाली’ योजना का बजट आधा
तेलंगाना: चुनावी वादों के लिए हर साल ₹1 लाख करोड़ की जरूरत
पंजाब: 12 साल से डीए एरियर लंबित, योजनाओं का खर्च आय से कहीं ज्यादा
क्यों बढ़ रहा संकट?
चुनावी घोषणाएं ज्यादा, आमदनी कम
सब्सिडी और नकद योजनाओं का बढ़ता दायरा
वेतन, पेंशन और ब्याज पर भारी खर्च
विकास कार्यों के बजट में कटौती
राज्यों का वित्तीय हाल (संक्षेप में) राज्य घोषणाओं का बोझ राजस्व (लाख करोड़) हिस्सा कर्ज (GSDP %)
तेलंगाना
₹95,000 करोड़
2.41 39% 34-35%
आंध्र प्रदेश
₹80,000 करोड़ 2.70 30% 33-34%
मध्य प्रदेश
₹50,000 करोड़ 3.08 16% 31-32%
पंजाब
₹40,000 करोड़ 1.26 32% 46-47%
हिमाचल
₹15,000 करोड़ 0.45 33% 44-45%
महाराष्ट्र
₹70,000 करोड़ 4.80 15% 18-19%
असर क्या हो रहा है?
शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में कटौती
सड़क और पानी परियोजनाएं प्रभावित
सरकारी कर्मचारियों के भुगतान में देरी
कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा
मायने
चुनावी ‘मुफ्त की रेवड़ियां’ अल्पकाल में राहत जरूर देती हैं, लेकिन दीर्घकाल में यह राज्यों की आर्थिक सेहत को कमजोर कर रही हैं। अगर समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया, तो विकास कार्यों और वित्तीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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