राजिम: रेत खदान में रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों पर हमला,भाजपा विधायक रोहित साहू के लठैत गुर्गों पर लगे गंभीर आरोप
राजिम: रेत खदान में रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों पर हमला, विधायक रोहित साहू के समर्थकों पर लगे गंभीर आरोप
गरियाबंद/राजिम। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पितईबंद रेत घाट में पत्रकारों पर हमले की घटना से पूरे प्रदेश में आक्रोश है। बताया जा रहा है कि अवैध रेत खनन की रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों को भाजपा विधायक रोहित साहू के कथित समर्थकों ने जमकर पीटा। हमले के बाद पत्रकारों ने खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, पितईबंद रेत घाट में अवैध खनन की सूचना पर कुछ पत्रकार मौके पर रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे। आरोप है कि यहां विधायक रोहित साहू के समर्थकों, जो भाजपा कार्यकर्ता भी बताए जा रहे हैं, ने रिपोर्टिंग करते देख पत्रकारों पर हमला कर दिया। पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें बुरी तरह पीटा गया और कैमरा व मोबाइल छीनने की कोशिश की गई।
स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत घाटों से लेकर अन्य निर्माण कार्यों तक में एकतरफा ठेके बांटे जा रहे हैं, जिनमें सत्ता से जुड़े लोगों का वर्चस्व है। विरोध या खुलासे की कोशिश करने वालों को धमकाया जा रहा है।
राजिम भाजपा विधायक रोहित साहू
भ्रष्टाचार पर सवाल, सुशासन पर तंज
प्रदेश में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद "सुशासन" के दावे किए जा रहे थे, लेकिन राजिम की इस घटना ने सरकार की नीयत और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि भाजपा की सरकार कांग्रेस शासन से भी ज्यादा भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों पर चल रही है।
कांग्रेस का विरोध, पत्रकारों में नाराजगी
घटना के बाद प्रदेशभर में पत्रकार संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। कई पत्रकार संघों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे धरना प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे। कांग्रेस ने भी विधायक रोहित साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई और सरकार की चुनौती
पुलिस ने तत्काल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी से बात खत्म हो जाएगी या पूरे रेत माफिया नेटवर्क पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
यदि सरकार इस मामले में कठोर कदम नहीं उठाती है तो आने वाले समय में उसे पत्रकारों और जनता, दोनों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला अब केवल पत्रकारों पर हमले का नहीं, बल्कि सत्ता की आड़ में हो रहे खुले भ्रष्टाचार और अपराध की ओर इशारा करता है।
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