नक्सल प्रभावित इलाके से निकली समृद्धि की मिसाल: आधुनिक खेती से किसान गोपाल ने बदली अपनी तकदीर
नक्सल प्रभावित इलाके से निकली समृद्धि की मिसाल: आधुनिक खेती से किसान गोपाल ने बदली अपनी तकदीर
रायपुर, 15 मई 2026।नक्सल प्रभावित क्षेत्र के किसानों के लिए ग्राम फुतकेल के प्रगतिशील कृषक गोपाल एर्रागोला आज प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। कभी केवल वर्षा आधारित धान की खेती तक सीमित रहने वाले गोपाल ने आधुनिक तकनीक, बहुफसली खेती और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन की दिशा बदल दी है। आज वे धान, मक्का, मूंगफली, मिर्च, सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मछली पालन के माध्यम से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
कठिन हालात में शुरू हुआ संघर्ष
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में खेती करना गोपाल के लिए आसान नहीं था। सीमित संसाधन और सिंचाई की कमी के कारण उनकी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि उनका खेत तालपेरू नदी के किनारे स्थित है, जो सिंचित और व्यावसायिक खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। इसके बाद जिला प्रशासन की पहल पर नदी किनारे विद्युत विस्तार कराया गया, जिससे खेत तक सिंचाई सुविधा पहुंच सकी।
आधुनिक खेती से बढ़ी आय
सिंचाई सुविधा मिलने के बाद कृषि विभाग और आत्मा योजना के अधिकारियों ने गोपाल को आधुनिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने फसल चक्र अपनाते हुए धान के साथ रबी मक्का, मूंगफली और मिर्च की खेती शुरू की। खासतौर पर मिर्च उत्पादन ने उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की।
गोपाल बताते हैं कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने समय-समय पर खेत का निरीक्षण कर उन्हें उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी, जिससे खेती के प्रति उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया।
सरकारी योजनाओं का मिला लाभ
गोपाल को विभिन्न शासकीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और तकनीकी सहायता मिली। किसान क्रेडिट कार्ड योजना से बीज, उर्वरक और नगद सहायता प्राप्त हुई। शाकम्भरी योजना के तहत डीजल पंप और नेक स्प्रेयर पंप उपलब्ध कराया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के जरिए प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये सीधे खाते में मिल रहे हैं।
इसके अलावा क्रेडा विभाग की सौर सुजला योजना से सोलर प्लेट, नियद नेल्लानार योजना से धान बीज, उर्वरक और भूमि जुताई सहायता तथा माइक्रो इरीगेशन योजना के तहत टपक सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ाया कदम
गोपाल का चयन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के क्लस्टर में भी हुआ। इसके तहत उन्होंने एक एकड़ भूमि में धान और मिर्च की खेती में जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग शुरू किया। इससे उत्पादन लागत कम हुई और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार आया।
सालाना करीब 4 लाख की शुद्ध आय
कृषि एवं कृषि आधारित व्यवसायों से गोपाल को धान, मूंगफली, मिर्च, सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मछली पालन से कुल 3 लाख 93 हजार 750 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई है। उनकी सफलता ने गांव के अन्य किसानों को भी आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
विकास की नई तस्वीर
गोपाल एर्रागोला की कहानी यह साबित करती है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, सिंचाई सुविधा और योजनाओं का लाभ मिले, तो नक्सल प्रभावित क्षेत्र भी विकास और समृद्धि की नई पहचान बन सकते हैं।
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