सरकारी निर्माण कार्यों पर संकट: डामर और टाइल्स की किल्लत से काम ठप होने के कगार पर
सरकारी निर्माण कार्यों पर संकट: डामर और टाइल्स की किल्लत से काम ठप होने के कगार पर
रायपुर, छत्तीसगढ़ | प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों पर बड़ा संकट मंडराता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर ईरान युद्ध के असर से निर्माण सामग्रियों के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते कई परियोजनाएं ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा असर सड़कों और सरकारी भवन निर्माण पर पड़ा है। डामर (बिटुमेन) और टाइल्स की कमी ने ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे हालात में प्रदेशभर के ठेकेदार अब पीडब्ल्यूडी और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत चल रहे कार्यों को रोकने की तैयारी में हैं।
10 अप्रैल को ठेकेदारों की अहम बैठक
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने 10 अप्रैल को प्रदेशस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में निर्माण कार्यों को बंद करने जैसे बड़े फैसले पर विचार किया जा सकता है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के मुताबिक,
“टेंडर स्वीकृति के समय जो दरें थीं, अब उनसे 20–25% तक लागत बढ़ चुकी है। डामर का स्टॉक नहीं मिल रहा, ऐसे में काम करना संभव नहीं है।”
क्यों गहराया संकट?
डामर क्रूड ऑयल से बनता है, जिसकी कीमत 50 हजार/टन से बढ़कर 84 हजार/टन पहुंच गई
गैस की कमी से टाइल्स उत्पादन प्रभावित
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर
स्टील और अन्य सामग्रियों के दाम में तेज उछाल
इसका सीधा असर सड़क निर्माण, ओवरब्रिज और अंडरब्रिज जैसी परियोजनाओं पर पड़ा है।
निर्माण कार्यों पर सीधा असर
सड़क डामरीकरण का काम प्रभावित
सरकारी भवनों का निर्माण धीमा
ओवरब्रिज और अंडरब्रिज परियोजनाओं में देरी
ठेकेदारों पर आर्थिक दबाव
गर्मी का मौसम सड़क निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, लेकिन इसी समय काम रुकने की स्थिति बनना चिंता का विषय है।
सामग्रियों के बढ़ते दाम (एक नजर में)सामग्री पहले कीमत अब कीमत
स्टील
₹5500/क्विंटल
₹6500/क्विंटल
सीमेंट
₹260/बोरी
₹290/बोरी
डामर
₹50,000/टन
₹84,000/टन
एल्यूमिनियम पार्ट
₹320/किलो
₹435/किलो
गिट्टी
₹22/फीट
₹40–42/फीट
सरकार से क्या मांग?
ठेकेदारों का कहना है कि:पहले से स्वीकृत टेंडरों की दरों को रीवाइज किया जाए
निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों के अनुसार भुगतान तय हो
डामर और टाइल्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए
आगे क्या?
10 अप्रैल को होने वाली कोर कमेटी की बैठक में ठेकेदार अंतिम निर्णय लेंगे। अगर काम बंद करने का फैसला होता है, तो इसका सीधा असर प्रदेश के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों पर पड़ेगा।
निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें और किल्लत ने छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। अब सबकी नजर 10 अप्रैल की बैठक और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
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