राणा सांगा विवाद: राजनीति की जंग में इतिहास के योद्धा पर बयानबाजी!
नई दिल्ली। भारत के गौरवशाली इतिहास में राणा सांगा का नाम वीरता और पराक्रम का प्रतीक है, लेकिन हाल ही में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के एक विवादित बयान ने इस ऐतिहासिक योद्धा को सुर्खियों में ला दिया है। सांसद ने राज्यसभा में राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहकर संबोधित किया, जिसके बाद बवाल मच गया।
करणी सेना का उग्र प्रदर्शन
बयान के तुरंत बाद करणी सेना और कई राजपूत संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। आगरा में सांसद रामजी लाल सुमन के घर पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने घेराव किया और तोड़फोड़ भी की। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना था कि पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
राजनीति में उबाल, बयानबाजी तेज़
भाजपा और कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकनी शुरू कर दी हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल ने इस बयान की कड़ी आलोचना की, जबकि भाजपा सांसदों ने संसद में इस मुद्दे को उठाकर सुमन के निलंबन की मांग कर दी।
इतिहास पर नई बहस!
राणा सांगा कौन थे? क्या उनका योगदान गद्दारी की परिभाषा में आता है, या वे भारत की एकता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले योद्धा थे? यह बहस अब और तेज हो गई है। इतिहासकारों का कहना है कि राणा सांगा ने मुगलों के खिलाफ कई युद्ध लड़े और कभी विदेशी ताकतों के सामने नहीं झुके।
क्या यह मुद्दा राजनीति तक ही सीमित रहेगा, या इससे इतिहास को देखने का नजरिया बदलेगा? यह तो आने वाला समय
ही बताएगा!
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