32 पुनर्वासित युवाओं को मेसन आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता: सुकमा में युवाओं को मिली नए जीवन की मजबूत नींव
आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता: सुकमा में युवाओं को मिली नए जीवन की मजबूत नींव
32 पुनर्वासित युवाओं को मेसन आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता: सुकमा में युवाओं को मिली नए जीवन की मजबूत नींव
32 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट वितरण, रोजगार के नए अवसरों का द्वार खुला
रायपुर, 3 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की मानवीय, संवेदनशील और दूरदर्शी पुनर्वास नीति अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिनसे आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
इसी दिशा में सुकमा जिला मुख्यालय स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में 32 आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। कार्यक्रम कलेक्टर अमित कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जहां उन्होंने युवाओं से सीधे संवाद कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पुनर्वास का लक्ष्य: आत्मनिर्भरता और सम्मान
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि पुनर्वास केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं को स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मान दिलाना है। उन्होंने कहा कि दी गई मेसन किट केवल औजार नहीं, बल्कि नए जीवन की मजबूत नींव है।
रोजगार के बढ़ते अवसर
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राजमिस्त्री का कौशल ऐसा है, जिसके माध्यम से युवा मेहनत और ईमानदारी के बल पर कुशल कारीगर बन सकते हैं। आगे चलकर वे स्वरोजगार, ठेकेदारी और उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।
नई दिशा, नया जीवन
इस पहल के जरिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुनर्वास का अर्थ केवल मुख्यधारा में वापसी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मेसन किट मिलने से युवाओं को निर्माण कार्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। वितरण, रोजगार के नए अवसरों का द्वार खुला
छत्तीसगढ़ सरकार की मानवीय, संवेदनशील और दूरदर्शी पुनर्वास नीति अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिनसे आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
इसी दिशा में सुकमा जिला मुख्यालय स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में 32 आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। कार्यक्रम कलेक्टर अमित कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जहां उन्होंने युवाओं से सीधे संवाद कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पुनर्वास का लक्ष्य: आत्मनिर्भरता और सम्मान
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि पुनर्वास केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं को स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मान दिलाना है। उन्होंने कहा कि दी गई मेसन किट केवल औजार नहीं, बल्कि नए जीवन की मजबूत नींव है।
रोजगार के बढ़ते अवसर
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राजमिस्त्री का कौशल ऐसा है, जिसके माध्यम से युवा मेहनत और ईमानदारी के बल पर कुशल कारीगर बन सकते हैं। आगे चलकर वे स्वरोजगार, ठेकेदारी और उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।
नई दिशा, नया जीवन
इस पहल के जरिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुनर्वास का अर्थ केवल मुख्यधारा में वापसी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मेसन किट मिलने से युवाओं को निर्माण कार्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे।
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