हास्य साहित्य जगत को गहरा झटका, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे का निधन

A big blow to the world of comedy literature, Padma Shri Dr. Surendra Dubey passes away हास्य साहित्य जगत को गहरा झटका, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे का निधन
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हास्य साहित्य जगत को गहरा झटका, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे का निधन

हास्य साहित्य जगत को गहरा झटका, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे का निधन

रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा और हिंदी हास्य कविता के सुप्रसिद्ध कवि, पद्मश्री सम्मानित डॉ. सुरेन्द्र दुबे का आज दुखद निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और रायपुर स्थित ACI अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां हार्ट अटैक आने से उनका निधन हो गया।

छत्तीसगढ़ से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक बनाई पहचान

डॉ. सुरेन्द्र दुबे का जन्म 8 जनवरी 1953 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले के बेमेतरा में हुआ था। हास्य-व्यंग्य कविता के क्षेत्र में उन्होंने देशभर के काव्य मंचों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। वे अनेक टेलीविजन कार्यक्रमों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे और अपने चुटीले अंदाज व सामाजिक व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाते रहे।

साहित्य में उल्लेखनीय योगदान

डॉ. दुबे ने अपने साहित्यिक सफर में पाँच किताबें लिखीं। उनके लेखन और मंचीय प्रस्तुतियों को साहित्य जगत ने खूब सराहा। उनके हास्य और व्यंग्य का अंदाज जनमानस के बेहद करीब था, जिसमें वे सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं पर तीखा, लेकिन सधे हुए अंदाज में कटाक्ष करते थे।

सम्मानों की लंबी फेहरिस्त

हास्य साहित्य में अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2010 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाज़ा। इसके अलावा वर्ष 2008 में काका हाथरसी हास्य रत्न पुरस्कार, 2012 में पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान, अट्टहास सम्मान और अमेरिका में लीडिंग पोएट ऑफ इंडिया सम्मान से उन्हें अलंकृत किया गया।

वर्ष 2019 में अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी एसोसिएशन समारोह में उन्हें हास्य शिरोमणि सम्मान प्रदान किया गया। उनकी रचनाओं पर देश के तीन विश्वविद्यालयों में शोध कर पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई है, जो उनकी साहित्यिक और अकादमिक प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

विदेशों में भी बिखेरा काव्य का जादू

डॉ. सुरेन्द्र दुबे ने न केवल देश में, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा सहित कई देशों में काव्य मंचों पर अपनी हास्य कविताओं से लोगों का दिल जीता। उनकी उपस्थिति हर मंच को जीवंत बना देती थी और वे अपनी व्यंग्यपूर्ण शैली में सामाजिक मुद्दों को बेहद रोचक अंदाज में प्रस्तुत करते थे।

साहित्य जगत में शोक की लहर

डॉ. सुरेन्द्र दुबे के निधन की खबर से साहित्य और कला जगत में शोक की लहर है। अनेक साहित्यकारों, कवियों और उनके चाहने वालों ने सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उनकी कमी को हास्य साहित्य जगत लंबे समय तक महसूस करता रहेगा।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे

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