चित्रकूट में बाढ़ का कहर: मंडाकिनी का जलस्तर बढ़ने से घाट डूबे, सड़कों पर चल रही नावें
पिछले दो दिनों से सतना जिले के धार्मिक स्थल चित्रकूट में मूसलधार बारिश का कहर लगातार जारी है। इस भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति मंडाकिनी नदी के जलस्तर में भारी वृद्धि के कारण उत्पन्न हुई है। नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे रामघाट, भरतघाट और अन्य प्रमुख घाट जलमग्न हो गए हैं।
बाढ़ का पानी पुरानी लंका तिराहा और एमपी बॉर्डर के एमपी-1 तिराहे तक पहुंच चुका है। इस वजह से स्थानीय आवाजाही पर गहरा असर पड़ा है। लोगों के घरों और दुकानों में पानी भर गया है, जिससे जन-संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब सड़कों पर नावें चलाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य उन्हें वर्ष 2003 की विनाशकारी बाढ़ की याद दिला रहा है। उस समय भी चित्रकूट इसी तरह जलमग्न हो गया था।
इस संकट के समय में स्थानीय नाविक राहत कार्यों में लगे हुए हैं। वे उन लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं, जो बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है और लगातार निगरानी रख रहा है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए खतरा अभी टला नहीं है।
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