छत्तीसगढ़ में 'सुशासन तिहार' की धूम: जनसमस्याओं के समाधान का पर्व शुरू
छत्तीसगढ़ सरकार ने जनता से सीधे संवाद और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक अनोखी पहल की है – 'सुशासन तिहार'। यह पर्व न केवल प्रशासनिक दक्षता को प्रदर्शित करता है, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी को भी केंद्र में रखता है।
तीन चरणों में होगा आयोजन
यह आयोजन तीन चरणों में संपन्न होगा। पहले चरण में 8 से 11 अप्रैल तक प्रत्येक पंचायत, नगरीय निकाय, ब्लॉक और जिला कार्यालयों में 'समाधान पेटियां' लगाई गई हैं। इन पेटियों में आम लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव दर्ज करवा सकते हैं।
दूसरे चरण में, एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का समाधान किया जाएगा। जिला और शासन स्तर पर इनका परीक्षण कर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
तीसरे चरण में 5 से 31 मई तक क्लस्टर स्तर पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे। यहां नागरिकों को उनके प्रकरण की स्थिति और समाधान की जानकारी दी जाएगी, साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति उन्हें जागरूक किया जाएगा।
ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन की सुविधा
नागरिक अपनी समस्याएं केवल लिखित रूप में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से भी दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए एक पोर्टल बनाया गया है जहां मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीयन कर शिकायत भेजी जा सकती है। समाधान की सूचना मोबाइल पर ही दी जाएगी।
जनभागीदारी को मिल रहा बढ़ावा
जिला कलेक्टरों और स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से इस अभियान में अधिक से अधिक भाग लेने की अपील की है। कई स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, जनजागरूकता रैलियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के ज़रिये लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की विशेष दिलचस्पी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस आयोजन की स्वयं निगरानी कर रहे हैं और कई शिविरों में आम जनता से सीधा संवाद भी करेंगे। यह पहल उनके 'जनता के साथ सरकार' की सोच को दर्शाती है।
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