छत्तीसगढ़ की राखियों से सजेगी सैनिकों की कलाई: महासमुंद की बहनों ने भेजा स्नेह और सम्मान

Soldiers' wrists will be adorned with Rakhis from Chhattisgarh: Sisters from Mahasamund sent their love and respect छत्तीसगढ़ की राखियों से सजेगी सैनिकों की कलाई: महासमुंद की बहनों ने भेजा स्नेह और सम्मान
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छत्तीसगढ़ की राखियों से सजेगी सैनिकों की कलाई: महासमुंद की बहनों ने भेजा स्नेह और सम्मान

छत्तीसगढ़ की राखियों से सजेगी सैनिकों की कलाई: महासमुंद की बहनों ने भेजा स्नेह और सम्मान

रायपुर, 21 जुलाई 2025 – इस रक्षाबंधन पर देश की सीमाओं पर तैनात हमारे वीर जवानों की कलाइयों पर छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह और सम्मान सजेगा। महासमुंद जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं ने एक अनोखी पहल करते हुए अपने हाथों से राखियां बनाकर सैनिकों के लिए भेजी हैं। इन राखियों के साथ भेजे गए भावनात्मक पत्रों में उन्होंने अपने 'वीर भाईयों' के प्रति प्रेम, आभार और सम्मान प्रकट किया है।

देशभक्ति और संवेदनशीलता का संदेश

महासमुंद शहरी सेक्टर 01 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती राखी दुबे ने बताया कि, "यह केवल एक राखी नहीं, बल्कि विश्वास और सुरक्षा के उस रिश्ते का प्रतीक है, जो हम बहनों को हमारे सैनिक भाइयों से जोड़ता है।" उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल घरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन असली रक्षकों के साथ भी मनाया जाना चाहिए जो देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगे हैं।

भावनात्मक जुड़ाव की मिसाल

इन राखियों के साथ बहनों ने जो पत्र भेजे हैं, उनमें उन्होंने सैनिकों को ‘परिवार का हिस्सा’ मानते हुए उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश की है। यह पहल न सिर्फ संवेदनशीलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं राष्ट्र सेवा और सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के नए-नए मार्ग तलाश रही हैं।

समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी

इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद श्री माखन पटेल, पूर्व पार्षद श्रीमती शोभा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री टी. जटवार, पर्यवेक्षक श्रीमती शीला प्रधान, नगर पालिका की सीओ श्रीमती ममता बग्गा, आंगनबाड़ी सहायिका भानमती साहू, और वीणा महिला समिति की सदस्य श्रीमती सरला वर्मा और अनिता बिसेन सहित अनेक माताएं एवं बहनें उपस्थित रहीं।

सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज में देशप्रेम, सेवा और संस्कारों के केंद्र बनते जा रहे हैं।

🔹 संपादकीय टिप्पणी:

महासमुंद की यह पहल न केवल एक सांस्कृतिक त्योहार को राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि छोटे शहरों और गांवों की महिलाएं भी बड़े संदेश दे सकती हैं — देश सबसे पहले।

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