हसदेव अरण्य में आदिवासियों पर बर्बरता अडानी की खनन परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ विरोध

Protests against Adani's mining project turn violent as tribals are brutalised in Hasdeo Aranya हसदेव अरण्य में आदिवासियों पर बर्बरता अडानी की खनन परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ विरोध
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हसदेव अरण्य में आदिवासियों पर बर्बरता अडानी की खनन परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ विरोध

हसदेव अरण्य में आदिवासियों पर बर्बरता अडानी की खनन परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ विरोध

रायपुर। छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में आदिवासी ग्रामीणों द्वारा कोयला खनन और पेड़ों की कटाई के खिलाफ लंबे समय से जारी आंदोलन ने गुरुवार को हिंसक मोड़ ले लिया। परसा कोल ब्लॉक क्षेत्र में विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज कर दिया। इस दौरान हसदेव बचाओ संघर्ष समिति के नेता रामलाल करियाम सहित कई ग्रामीण घायल हुए।

खनन के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई

हसदेव के जंगलों में स्थित परसा कोल माइंस का संचालन अडानी समूह की कंपनी कर रही है। इस परियोजना के लिए हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। आदिवासी समुदाय के जल, जंगल और जमीन के अधिकार भी इस खनन परियोजना की वजह से खतरे में हैं।

धनुष-बाण लेकर विरोध पर उतरे ग्रामीण, भारी पुलिस बल ने दबाया आंदोलन

लाठीचार्ज से आक्रोशित ग्रामीण धनुष, तीर और गुलेल लेकर जंगल में एकत्र हुए और पेड़ों की कटाई रोकने का प्रयास किया, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी ने विरोध को कुचल दिया। प्रशासन ने कटाई का काम जारी रखा।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन का आरोप – फर्जी मंजूरी, जनविरोधी परियोजना

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने आरोप लगाया कि परसा कोल खदान को मिली वन और पर्यावरणीय मंजूरी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दी गई है।

संगठन के संयोजक आलोक शुक्ला ने कहा:

> “हसदेव अरण्य मध्य भारत के फेफड़े हैं। यहां की आदिवासी आबादी पीढ़ियों से जंगलों की रक्षा कर रही है, लेकिन आज उन्हें बलपूर्वक उजाड़ा जा रहा है।”

राहुल गांधी का भाजपा सरकार पर हमला

नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:

> “हसदेव अरण्य में पुलिस बल के हिंसक प्रयोग से आदिवासियों के जंगल और ज़मीन के जबरन गबन का प्रयास, उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।”

उन्होंने भाजपा सरकार को पूंजीपतियों की समर्थक बताते हुए कहा कि सरकार अडानी समूह जैसे उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को हड़प रही है।

राहुल गांधी ने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय विधानसभा में सर्वसम्मति से हसदेव जंगल की रक्षा का प्रस्ताव पारित किया गया था।

> "कांग्रेस हर कीमत पर आदिवासी भाइयों और बहनों के अधिकारों की रक्षा करेगी।” – राहुल गांधी

विस्थापन और पारिस्थितिक संकट

परसा कोल परियोजना के चलते सैकड़ों परिवार पहले ही विस्थापित हो चुके हैं, और हजारों परिवारों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय ग्राम सभाएं वर्षों से इस परियोजना का विरोध कर रही हैं, लेकिन प्रशासनिक दमन और बल प्रयोग से आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।

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