छत्तीसगढ़ के चर्चित बिल्डर व अभिनेता मनोज राजपूत के खिलाफ एफआईआर: आपराधिक इतिहास छिपाकर बनवाया पासपोर्ट, पुलिस जांच कटघरे में
छत्तीसगढ़ के चर्चित बिल्डर व अभिनेता मनोज राजपूत के खिलाफ एफआईआर: आपराधिक इतिहास छिपाकर बनवाया पासपोर्ट, पुलिस जांच कटघरे में
दुर्ग, 25 जुलाई 2025 — छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चर्चित बिल्डर, जमीन कारोबारी और छत्तीसगढ़ी फिल्मों के अभिनेता-निर्माता मनोज राजपूत एक बार फिर विवादों में हैं। उनके खिलाफ सुपेला थाना में गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपना आपराधिक इतिहास छिपाकर फर्जी तरीके से पासपोर्ट हासिल किया है।
क्या है मामला?
एफआईआर के मुताबिक, मनोज राजपूत ने पासपोर्ट आवेदन के दौरान अपना आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने के लिए झूठा शपथ पत्र तैयार किया और अपना मूल पता बदल दिया। वह मूल रूप से मोहन नगर थाना क्षेत्र का निवासी है, लेकिन पासपोर्ट आवेदन में सुपेला थाना क्षेत्र का पता दिया। इसके आधार पर उन्हें सुपेला थाना से क्लीन चिट मिल गई और पासपोर्ट जारी कर दिया गया।
जबकि नियमानुसार, पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है, जिसमें व्यक्ति का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 11 आपराधिक मामलों में लिप्त एक व्यक्ति को पुलिस की स्वीकृति कैसे मिल गई?
दर्ज हैं कई संगीन अपराध
मनोज राजपूत पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें दुष्कर्म, पोक्सो एक्ट, धोखाधड़ी, मारपीट और धमकी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उनकी आपराधिक प्रवृत्ति के चलते दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में उन्हें गुंडा-बदमाश सूची में भी शामिल किया गया है।
कौन है मनोज राजपूत?
मनोज राजपूत छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अभिनेता और निर्माता के रूप में सक्रिय रहे हैं। इसके साथ ही वह जमीन के बड़े कारोबारी भी हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में उन्होंने आपराधिक गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की, लेकिन अब उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर कैसे एक गंभीर अपराधों में लिप्त व्यक्ति को क्लीन चिट दी गई? क्या वेरिफिकेशन में लापरवाही हुई या फिर जानबूझकर नियमों को ताक पर रखकर रिपोर्ट तैयार की गई? इसकी जांच अब उच्चस्तरीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी का, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि कानून इस पर क्या रुख अपनाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
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