‘परख’ रिपोर्ट में खुलासा: आधे से ज्यादा बच्चों को नहीं याद पहाड़ा, गणित और भाषा में भी कमजोर
शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। लेकिन अगर उसी शिक्षा की बुनियाद कमजोर हो, तो पूरा ढांचा हिल सकता है। हाल ही में जारी मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन की ‘परख’ रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के स्कूलों की जो तस्वीर सामने आई है, वह चिंताजनक है। यह रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के छात्र मूलभूत शैक्षणिक दक्षताओं में बहुत पीछे हैं।
मुख्य बिंदु:
1. गणित में बच्चों की कमजोर पकड़:
प्रदेश के 50% से ज्यादा छात्र कक्षा 2 से 10 तक का पहाड़ा तक नहीं याद कर पा रहे हैं। यहां तक कि कक्षा 3 में पढ़ने वाले 45% बच्चे 99 तक की गिनती को ठीक से पहचान नहीं पाते और उन्हें सही क्रम में नहीं रख सकते।
2. SC वर्ग के बच्चों की और भी दयनीय स्थिति:
अनुसूचित जाति के छात्र लैंग्वेज, मैथ्स और अपने आसपास की दुनिया को समझने में अन्य वर्गों के मुकाबले कमजोर हैं।
3. शहरी बनाम ग्रामीण शिक्षा:
गांवों के बच्चे बोलचाल में शहरी बच्चों से बेहतर हैं और कैलकुलेशन (गणना) भी जल्दी कर लेते हैं। वे अपने आसपास की दुनिया को ज्यादा गहराई से समझते हैं। दूसरी ओर, शहरी छात्रों की भाषा पर पकड़ कमजोर है।
4. सरकारी स्कूलों की सकारात्मक छवि:
यह रिपोर्ट इस बात को भी दर्शाती है कि कई मामलों में सरकारी स्कूलों के छात्र निजी स्कूलों के छात्रों से आगे हैं, विशेषकर भाषा और पर्यावरण विषयों में।
5. रायपुर की गिरती रैंकिंग:
राज्य की राजधानी रायपुर की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। ‘परख’ रिपोर्ट में रायपुर को कक्षा 3 के टॉप 50 शहरों में 26वां स्थान मिला है।
इसके अलावा सुकमा 10वें, नारायणपुर 20वें और कोरबा 45वें नंबर पर रहा।
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