धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में युवक व दो नन जेल भेजे गए
छत्तीसगढ़ नौकरी दिलाने के नाम पर भोली-भाली युवतियों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्य ले जाने की घटनाएं आज एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले की तीन युवतियों को इसी प्रकार आगरा ले जाया जा रहा था, लेकिन दुर्ग रेलवे स्टेशन पर समय रहते पुलिस ने कार्रवाई कर तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
घटना का विवरण:
दोपहर करीब 2 बजे दुर्ग रेलवे स्टेशन पर तीन डरी-सहमी युवतियों को दो ननों और एक युवक के साथ देखा गया। मुखबिर की सूचना पर पहुंची जीआरपी ने तत्काल पूछताछ शुरू की। पूछताछ में युवतियों ने बताया कि उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा देकर वहां लाया गया था। उनकी उम्र 18 से 19 वर्ष के बीच है, जिनमें दो ओरछा और एक कुकड़ाझोर की रहने वाली हैं।
तीनों युवतियों को अगवा करने के प्रयास में गिरफ्तार किए गए युवक का नाम सुखमन मंडावी है, जो नारायणपुर का निवासी है। उसके साथ आगरा से आईं दो नन — प्रीति मेरी और वंदना फ्रांसिस — थीं। इन सभी को गिरफ्तार कर पुलिस थाने लाया गया।
कानूनी पहलू:
गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ मानव तस्करी की धारा 143 बीपीसी एवं छत्तीसगढ़ धर्मांतरण अधिनियम 1968 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 8 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
युवतियों की गवाही:
पूछताछ के दौरान युवतियों ने बताया कि उन्हें हर प्रकार की सुविधा, अच्छा वेतन (8 से 10 हजार रुपए प्रति माह) और स्थायी नौकरी देने का लालच दिया गया था। शुरू में कहा गया था कि उन्हें छत्तीसगढ़ में ही नौकरी दी जाएगी, लेकिन बाद में उन्हें चुपचाप उत्तर प्रदेश के आगरा ले जाया जा रहा था।
सामाजिक प्रतिक्रिया:
घटना की जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई हो और पीड़ितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यह घटना समाज के लिए चेतावनी है कि किस प्रकार धर्मांतरण और मानव तस्करी जैसे अपराध एक सुनियोजित तरीके से चल रहे हैं।
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