"कुर्सी पर बैठकर धान रोपती दिखीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, कांग्रेस ने उठाए सवाल"
धान रोपाई में कुर्सी पर बैठीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े! सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर, उठे सवाल – दिखावा या जमीनी जुड़ाव?
रायपुर। छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बना है खेत में धान की रोपाई करते हुए उनका एक वायरल फोटो, जिसमें वह कुर्सी पर बैठकर खेत में काम करती नजर आ रही हैं। यह तस्वीर खुद मंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से साझा की, लेकिन इसके बाद से उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
इस वायरल तस्वीर पर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस पर तंज कसते हुए सवाल किया है – "क्या अब धान रोपाई के लिए भी खास मंत्री व्यवस्था होगी?"
विपक्षी दलों ने इसे सिर्फ एक ‘फोटो ऑप’ करार दिया, जबकि मंत्री समर्थकों ने इसे मंत्री के जमीनी जुड़ाव की मिसाल बताया।
राजनीतिक प्रचार का नया तरीका?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बीते कुछ वर्षों से एक नया ट्रेंड देखा जा रहा है, जिसमें नेता खुद को किसान के रूप में प्रस्तुत करने के लिए खेतों में फोटो-वीडियो शूट करवा कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी अब इसी ट्रेंड में शामिल हो गई हैं।
मंगलवार को मंत्री अपने गांव स्थित खेत में पहुंचीं, जहां उन्होंने पहले खेत की जुताई देखी, फिर बीज उखाड़े और उसके बाद धान की रोपाई भी की। इस दौरान उन्होंने एक कुर्सी पर बैठकर रोपाई की, जो कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते वायरल हो गया।
सवालों के घेरे में ‘धरातल से जुड़ाव’
इस तस्वीर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या यह असल में खेत से जुड़ाव है या सिर्फ दिखावे की राजनीति? आलोचकों का कहना है कि अगर मंत्री वास्तव में किसानों के साथ काम करना चाहती हैं तो फिर कुर्सी की क्या जरूरत पड़ी?
समर्थकों की सफाई
वहीं मंत्री के समर्थकों का कहना है कि लक्ष्मी राजवाड़े ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं और कृषि कार्यों में उनकी रुचि शुरू से रही है। कुर्सी पर बैठकर रोपाई करना उनकी किसी स्वास्थ्य स्थिति या सुविधा का हिस्सा हो सकता है, जिसे बेवजह विवाद का रूप दिया जा रहा है।
मायने
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि आज के समय में नेताओं की हर गतिविधि केवल कार्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका व्यापक प्रभाव सोशल मीडिया और राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ता है। चाहे यह तस्वीर जनसंपर्क का प्रयास हो या वास्तविक खेत से जुड़ाव – जनता का नजरिया अब तय करता है कि नेता की छवि क्या बनेगी।
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