आईएएस यशवंत को खेल एवं युवा कल्याण विभाग का नया जिम्मा: प्रशासनिक पुनर्गठन की पहल

आईएएस यशवंत कुमार को खेल एवं युवा कल्याण विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। हिमशिखर गुप्ता को इस विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया।
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आईएएस यशवंत को खेल एवं युवा कल्याण विभाग का नया जिम्मा: प्रशासनिक पुनर्गठन की पहल

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता और दक्षता लाने के उद्देश्य से एक अहम निर्णय लेते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी यशवंत कुमार को खेल एवं युवा कल्याण विभाग का सचिव नियुक्त किया है। यशवंत वर्तमान में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (Chief Electoral Officer) के पद पर भी कार्यरत हैं। अब उन्हें इस नए विभाग की जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपी गई है।

इस आदेश के साथ ही आईएएस हिमशिखर गुप्ता, जो अभी तक इस विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें इससे मुक्त कर दिया गया है। गुप्ता अब केवल अपने मुख्य विभागों - श्रम विभाग, गृह एवं जेल विभाग के दायित्वों पर केंद्रित रहेंगे।

यह नियुक्ति भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली की अनुशंसा पर आधारित है, जिसका उल्लेख छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से किया गया है। आदेश क्रमांक 154/CGH/2025-P.Admn, दिनांक 27 जून 2025 को आयोग द्वारा भेजा गया, जिस पर 7 जुलाई को राज्य सरकार ने कार्यवाही की।

इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता दे रही है। यशवंत कुमार जैसे अनुभवी और कर्मठ अधिकारी को इस विभाग की जिम्मेदारी सौंपना सरकार की उस सोच का परिचायक है, जो युवा कल्याण, खेल विकास और बेहतर नीतियों के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

यशवंत कुमार की प्रशासनिक शैली हमेशा से प्रभावी रही है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। अब इसी अनुभव और कार्यशैली का लाभ खेल एवं युवा कल्याण विभाग को भी मिलेगा। यह विभाग राज्य के युवाओं को खेल और सामाजिक विकास के माध्यम से मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस नई जिम्मेदारी के साथ यह अपेक्षा की जा रही है कि राज्य के खेल बजट, युवाओं के लिए नई योजनाएं, खेल प्रतियोगिताएं और सुविधाओं के विस्तार जैसे मुद्दों को अब और अधिक गम्भीरता से सुलझाया जाएगा। साथ ही विभागीय नीतियों को निर्वाचन नियमों की तरह अनुशासन और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा।

अंततः, यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन के उस लक्ष्य की ओर संकेत करता है जिसमें हर विभाग को उसका उपयुक्त नेतृत्व दिया जाए और जनहित में कार्यों की गुणवत्ता को प्राथमिकता मिले।

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