सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की भूपेश बघेल की याचिका, गिरफ्तारी की आशंका बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की भूपेश बघेल की याचिका, गिरफ्तारी की आशंका बढ़ी
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर अदालत ने सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके साथ ही उनकी गिरफ्तारी की आशंका और बढ़ गई है।
भूपेश बघेल ने उस प्रावधान को चुनौती दी थी, जिसके तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में पूरक चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा— "गड़बड़ी कानून में नहीं, बल्कि उसके दुरुपयोग में है।" अदालत ने स्पष्ट किया कि सबूत जुटाने पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल को यह विकल्प दिया कि यदि उन्हें लगे कि ईडी अक्टूबर 2022 के फैसले में तय प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही है, तो वे हाई कोर्ट जा सकते हैं।
कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि 1898 की दंड प्रक्रिया संहिता में आगे की जांच का प्रावधान नहीं था, लेकिन 1973 में इसे जोड़ा गया ताकि अतिरिक्त पुलिस रिपोर्ट दाखिल की जा सके। पूरक चार्जशीट दाखिल करने में कुछ भी अवैध नहीं है, क्योंकि यह आरोपी के पक्ष में भी जा सकती है।
सिब्बल के आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि ईडी बार-बार नई शिकायतें दाखिल करती है, जिससे ट्रायल शुरू नहीं हो पाता। पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है, फिर जांच के बाद नए नाम जोड़े जाते हैं।
अदालत ने हाल ही में (4 अगस्त) अमीर और प्रभावशाली लोगों के सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति पर आपत्ति जताई थी और भूपेश बघेल व उनके बेटे को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी।
कई मामलों में जांच जारी
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले, कोयला घोटाला, महादेव बेटिंग ऐप, राइस मिल और डीएमएफ घोटाले जैसे मामलों में सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है। जुलाई में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया गया था। अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेश बघेल की गिरफ्तारी भी कभी भी हो सकती है, जिससे प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ सकता है।
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