पिता होने के दावे पर विवाद, हाईकोर्ट ने DNA टेस्ट कराने के आदेश को सही ठहराया
कोरबा जिले से एक संवेदनशील और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला वकील ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामलाल मलिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि उनके बीच शारीरिक संबंध थे, जिससे उसे एक बेटी हुई। महिला ने यह भी कहा कि उक्त बच्ची श्यामलाल मलिक की ही संतान है।
हालांकि, जब महिला और बच्ची को किसी प्रकार का अधिकार नहीं मिला, तो महिला न्याय की उम्मीद में फैमिली कोर्ट पहुंची। उसने कोर्ट से आग्रह किया कि बच्ची के पितृत्व की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट करवाया जाए। फैमिली कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 8 अक्टूबर 2024 को महिला का आवेदन स्वीकार कर लिया और DNA जांच के आदेश जारी कर दिए।
इस आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ता श्यामलाल मलिक ने हाईकोर्ट में अपील की। उनका तर्क था कि DNA टेस्ट का आदेश अनुचित है। लेकिन हाईकोर्ट ने इस अपील को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि फैमिली कोर्ट को ऐसे मामलों में DNA टेस्ट कराने का अधिकार है और न्यायहित में इस तरह की जांच जरूरी मानी जाती है। इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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