attitude of police officers, “पुलिस अधिकारियों के रवैए से आहत, हवलदार ने क्वार्टर में फांसी लगाई”

“पुलिस अधिकारियों के रवैए से आहत, हवलदार ने क्वार्टर में फांसी लगाई”
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attitude of police officers,  “पुलिस अधिकारियों के रवैए से आहत, हवलदार ने क्वार्टर में फांसी लगाई”

  attitude of police officers, Havildar hanged    ड्यूटी पर लौटे हवलदार को नहीं मिली ज्वाइनिंग, तनाव में फांसी लगाकर दी जान

पत्नी अस्पताल में भर्ती, घरेलू विवाद और विभागीय दबाव से था परेशान – एएसपी ने दिए जांच के आदेश

रायपुर। राजधानी रायपुर पुलिस लाइन से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां पदस्थ 50 वर्षीय हवलदार राम आसरे पटेल ने बुधवार सुबह पुलिस लाइन क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना ने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हवलदार लंबे समय से मानसिक तनाव में था। उसकी पत्नी बीमार होकर निजी अस्पताल में भर्ती है, वहीं घर की आर्थिक स्थिति भी काफी बिगड़ चुकी थी। ऐसे हालात में ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के बाद जब वह वापस लौटा तो उसे ज्वाइनिंग नहीं दी गई। अधिकारियों की डांट-फटकार और गाली-गलौज से आहत होकर उसने यह कदम उठा लिया।

दो दिनों से कर रहा था ड्यूटी पर लौटने की कोशिश

जानकारी के अनुसार, हवलदार राम आसरे 26 अगस्त से ड्यूटी से गायब था। बताया गया कि वह अपनी बीमार पत्नी की देखभाल में लगा हुआ था। सोमवार को वह अचानक ड्यूटी पर पहुंचा, लेकिन प्रभारी अधिकारी ने उसे ज्वाइनिंग देने से मना कर दिया और कहा कि पहले उच्च अधिकारियों से अनुमति लानी होगी।

मंगलवार को भी राम आसरे ने ड्यूटी जॉइन करने की कोशिश की, लेकिन इस बार भी उसे अनुमति नहीं मिली। चर्चा है कि इस दौरान अधिकारियों ने उसके साथ गाली-गलौज भी की। इससे वह मानसिक रूप से टूट गया और अगले ही दिन सुबह पुलिस लाइन क्वार्टर के चौथे सक्मा में उसने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

घरेलू जिम्मेदारियों और आर्थिक संकट से था परेशान

कोतवाली पुलिस ने बताया कि हवलदार राम आसरे पटेल परिवार के साथ पुलिस लाइन क्वार्टर में रहता था। उसके एक बेटा और दो बेटियां हैं। पत्नी बीमार होने के कारण लंबे समय से अस्पताल में भर्ती है। इलाज में हजारों रुपये खर्च हो चुके थे, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया था।

इस बीच ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के कारण विभागीय दबाव भी झेलना पड़ रहा था। परिजनों और सहकर्मियों का कहना है कि घरेलू विवाद, बीमारी और नौकरी का दबाव – इन सबने मिलकर उसकी परेशानी और बढ़ा दी थी।

सुबह मिला शव, पुलिस विभाग में सन्नाटा

बुधवार सुबह जब क्वार्टर का दरवाजा देर तक नहीं खुला तो आसपास के पुलिसकर्मी पहुंचे। अंदर जाकर देखा गया कि राम आसरे ने फंदे पर लटककर जान दे दी थी। तत्काल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों और कोतवाली पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

घटना के बाद पुलिस लाइन परिसर में गमगीन माहौल है। कई साथी कर्मचारियों ने बताया कि राम आसरे शांत स्वभाव का था और हमेशा ड्यूटी ईमानदारी से करता था। परंतु पिछले कुछ समय से उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।

जांच के आदेश

घटना की गंभीरता को देखते हुए एएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह दुखद और संवेदनशील मामला है। आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाया जाएगा। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या दबाव की वजह से यह घटना हुई है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आत्महत्या से जुड़े सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग में व्याप्त कार्यप्रणाली और तनावपूर्ण माहौल को उजागर कर दिया है। अक्सर देखा गया है कि ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होती है, लेकिन कई बार उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक हालात को समझना बेहद जरूरी है। अगर समय रहते विभागीय स्तर पर सहानुभूति और सहयोग दिया जाता, तो शायद हवलदार राम आसरे अपनी जान न देता।

 यह खबर बताती है कि ड्यूटी का दबाव, पारिवारिक संकट और विभागीय रवैया मिलकर कभी-कभी पुलिसकर्मियों को बेहद कठिन हालात में धकेल देता है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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