केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मिलीभगत में मेडिकल कॉलेज मान्यता घोटाला, CBI की FIR में 35 नाम शामिल
भारत में चिकित्सा शिक्षा को लेकर आम जनता की अपेक्षाएं हमेशा से ऊँची रही हैं। डॉक्टर बनने का सपना हर वर्ष लाखों छात्र देखते हैं और इसी वजह से मेडिकल कॉलेजों की संख्या और उनके संचालन की पारदर्शिता भी बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन हाल ही में उजागर हुआ "मेडिकल कॉलेज मान्यता घोटाला" इस व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से लेकर निजी कॉलेजों के प्रबंधन और दलालों तक, सभी की मिलीभगत से यह घोटाला सामने आया है।
घोटाले का स्वरूप और कार्यप्रणाली:
CBI द्वारा दायर की गई FIR में कुल 35 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें 7 राज्यों—छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—के डॉक्टर, मेडिकल कॉलेज प्रबंधक, निजी कंपनियों के लोग और सरकारी अधिकारी शामिल हैं।
इस घोटाले में फर्जी निरीक्षण, नकली फैकल्टी, और बनावटी छात्रों के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाई जाती थी। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की निरीक्षण प्रक्रिया की गोपनीय जानकारी पहले से कॉलेजों को लीक कर दी जाती थी। इसके बाद निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए "फर्जी सेटअप" से अधिकारियों को गुमराह किया जाता था और कॉलेजों को पास दिखा दिया जाता था।
CBI की कार्रवाई और सबूत:
CBI ने देश के 6 राज्यों में एक साथ छापा मारकर 40 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली और 55 लाख रुपये की रिश्वत के साथ 6 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इनमें तीन डॉक्टर भी शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि एनएमसी के निरीक्षकों को पहले से सेट किया गया था और उनसे अनुकूल रिपोर्ट बनवाई जाती थी।
छत्तीसगढ़ के श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज (रायपुर) के ट्रस्टी, प्राचार्य और प्रशासक सहित अन्य प्रमुखों के नाम आरोपियों में हैं। राजस्थान के गीतांजलि विश्वविद्यालय, गुजरात और महाराष्ट्र के कॉलेजों से भी मिलीभगत के सबूत मिले हैं।
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