छत्तीसगढ़ में बच्चों के भविष्य को संवारेगी नई कार्ययोजना, 337 बाल विवाह रोके गए

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छत्तीसगढ़ में बच्चों के भविष्य को संवारेगी नई कार्ययोजना, 337 बाल विवाह रोके गए

रायपुर। बच्चों के संरक्षण और उनके उज्जवल भविष्य को लेकर राज्य सरकार ने कमर कस ली है। सोमवार को महानदी भवन स्थित मंत्रालय में राज्य बाल संरक्षण समिति की कार्यकारिणी और आमसभा की अहम बैठक आयोजित हुई। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव और समिति की अध्यक्ष शम्मी आबिदी ने इस दौरान समन्वित कार्ययोजना पर जोर देते हुए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल की बात कही।

बैठक में मिशन वात्सल्य योजना और किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर रणनीति तैयार की गई। बताया गया कि प्रदेश की 112 बाल देखरेख संस्थाओं में इस समय 2099 बच्चे निवासरत हैं। इनमें से 1307 बच्चे नियमित स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि 48 बच्चे ओपन स्कूल के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। 36 बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

सचिव ने निर्देश दिए कि इन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और कौशल विकास का अवसर दिया जाए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि बीते वर्ष 108 बच्चों को गोद लेने के लिए परिवार मिले, 1433 बच्चों को स्पांसरशिप योजना का लाभ मिला और 108 बच्चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत आर्थिक सहायता दी गई।

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 337 बाल विवाह रोके जा चुके हैं। बैठक में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 और आपात सेवा 112 के एकीकरण पर भी चर्चा हुई। तय हुआ कि इन सेवाओं के प्रचार-प्रसार को और मजबूत किया जाएगा, ताकि जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं तक जल्द से जल्द मदद पहुंच सके।

इसके अलावा, मिशन वात्सल्य के तहत राज्य में प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और ऑडिट कार्ययोजना को भी हरी झंडी दी गई। राज्य की बाल संरक्षण नीति के ड्राफ्ट को लेकर भी प्रगति साझा की गई।

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक पदुम सिंह एल्मा, स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव फरिहा आलम सहित गृह, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा विभाग, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रेलवे और एनआईसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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