"सरकार से टूटी उम्मीदें: अंगारों पर B.Ed शिक्षक, महिला टीचर्स की गुहार – ‘या तो नौकरी दो या मरने दो’"

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"सरकार से टूटी उम्मीदें: अंगारों पर B.Ed शिक्षक, महिला टीचर्स की गुहार – ‘या तो नौकरी दो या मरने दो’"

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में बर्खास्त B.Ed सहायक शिक्षक अपनी बहाली और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, लेकिन इस बार उन्होंने विरोध का तरीका ऐसा चुना कि देखने वालों की रूह कांप गई। शिक्षकों ने जलते अंगारों पर नंगे पांव चलकर अपनी व्यथा जताई और सरकार को अपनी "अग्नि परीक्षा" दिखा दी।

इस प्रदर्शन की सबसे मार्मिक तस्वीरें तब सामने आईं, जब महिला शिक्षिकाएं भी अंगारों पर चलती दिखीं। एक शिक्षिका ने कहा, "हम माता सीता की तरह अग्नि परीक्षा दे रहे हैं। अगर सरकार हमें बहाल नहीं कर सकती, तो इच्छामृत्यु की इजाजत दे दे।"

यह विरोध केवल क्रोध नहीं, बल्कि एक गहरी पीड़ा और टूटती उम्मीदों की कहानी है। कई शिक्षकों की आंखों में आंसू थे, और पैरों में छाले — लेकिन हौसले अब भी बुलंद।

प्रदर्शन के अनोखे पहलू:

113 दिन से लगातार धरना: राजधानी रायपुर में शिक्षक डटे हुए हैं।

2,621 फीट लंबी चुनरी यात्रा: इससे पहले शिक्षकों ने भगवान के दरबार में अपनी व्यथा पहुंचाने के लिए चुनरी यात्रा निकाली थी।

अंगारों पर चलना: अब उन्होंने साबित कर दिया कि वे केवल योग्यता से नहीं, हिम्मत से भी शिक्षक हैं।

इच्छामृत्यु की मांग: कुछ शिक्षकों ने कहा कि बेरोजगारी और अनदेखी की स्थिति में जीने से बेहतर है सरकार हमें मरने की इजाजत दे।

शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें नियुक्ति के बाद बर्खास्त कर दिया गया, जबकि वे सभी योग्य और प्रशिक्षित थे। अब वे सरकार से सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं—"जब हम योग्य थे, तो निकाला क्यों? और अगर अब निकाले गए हैं, तो जिएं कैसे?"

सरकार की तरफ से अब तक सिर्फ जांच कमेटी और भरोसे के आश्वासन मिले हैं, लेकिन शिक्षक अब कह रहे हैं कि भरोसे की नहीं, फैसले की जरूरत है।

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