कौन बरसा रहा है सौमिल चौबे पर कृपा? पूर्व सरकार की छाया में चमके अफसर की अब लंदन यात्रा की तैयारी!

Who is showering blessings on Saumil Choubey? The officer who shone in the shadow of the previous government is now preparing for a trip to London! कौन बरसा रहा है सौमिल चौबे पर कृपा? पूर्व सरकार की छाया में चमके अफसर की अब लंदन यात्रा की तैयारी!
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कौन बरसा रहा है सौमिल चौबे पर कृपा? पूर्व सरकार की छाया में चमके अफसर की अब लंदन यात्रा की तैयारी!

कौन बरसा रहा है सौमिल चौबे पर कृपा? पूर्व सरकार की छाया में चमके अफसर की अब लंदन यात्रा की तैयारी!

पहली विदेश यात्रा की रिपोर्ट अब तक नहीं, फिर भी मांगी गई दूसरी मंज़ूरी — सवालों के घेरे में सौमिल रंजन चौबे की विदेश यात्राएं

 [ख़ास रिपोर्ट | छत्तीसगढ़ ब्यूरो] छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सौमिल रंजन चौबे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कभी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और ओएसडी सौम्या चौरसिया के बेहद क़रीबी माने जाने वाले चौबे पर अब वर्तमान सरकार में भी कृपा की बारिश हो रही है — ऐसा नागरिक समाज और आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है।

मामला उनकी दूसरी विदेश यात्रा की स्वीकृति को लेकर है। सौमिल चौबे ने लंदन यात्रा के लिए एक बार फिर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से अनुमति माँगी है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि पहली विदेश यात्रा के परिणाम और सार्वजनिक रिपोर्ट के बिना आखिर उन्हें दोबारा विदेश भेजने की सिफारिश क्यों की जा रही है?

दो साल विदेश में, लेकिन न रिपोर्ट, न लाभ का ज़िक्र

सूत्रों के अनुसार, चौबे ने एक कथित सरकारी अध्ययन कार्यक्रम के नाम पर करीब दो साल विदेश में बिताए। इस दौरान उन्होंने पूरा वेतन, सरकारी भत्ते और सभी सुविधाएँ राज्य सरकार से प्राप्त कीं। लेकिन न तो यात्रा का कोई सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने आया, और न ही कोई नीतिगत रिपोर्ट जो यह बताए कि राज्य को इससे क्या लाभ मिला।

सवालों की बौछार

अब चौबे की नई लंदन यात्रा की स्वीकृति को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं:

पहली विदेश यात्रा का अध्ययन विषय क्या था?

इस दौरे पर कुल कितना सरकारी खर्च हुआ?

क्या वापसी पर कोई रिपोर्ट या नीति सुझाव राज्य सरकार को सौंपा गया?

किन उपलब्धियों के आधार पर उन्हें दोबारा विदेश भेजा जा रहा है?

क्या राज्य सरकार के पास ऐसी यात्राओं के प्रभाव का मूल्यांकन करने की कोई व्यवस्था है?

पारदर्शिता की माँग तेज

आरटीआई कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों ने GAD को एक खुले पत्र में मांग की है कि:

चौबे की विदेश यात्राओं से संबंधित सभी दस्तावेज और खर्च के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।

पहले अध्ययन दौरे की पूर्ण रिपोर्ट और निष्कर्ष जारी किए जाएं।

भविष्य में ऐसी यात्राओं के लिए पारदर्शी और उत्तरदायी प्रक्रिया लागू की जाए।

आरटीआई से जवाब की उम्मीद

रायपुर स्थित एक आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि इस मामले में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। इसमें चौबे की विदेश यात्रा की फाइलें, स्वीकृति आदेश, खर्च की जानकारी और मूल्यांकन रिपोर्ट मांगी गई है।

“सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये दौरे जनता के हित में हैं या किसी अफसर के लिए सैर-सपाटे का ज़रिया बन चुके हैं,” आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा।

मायने: जवाबदेही की दरकार

एक ऐसे समय में जब छत्तीसगढ़ आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की राह देख रहा है, सौमिल चौबे जैसे अधिकारियों की विदेश यात्राएं बिना पारदर्शिता और मूल्यांकन के सरकारी खर्च पर स्वीकृत की जा रही हैं — यह चिंता का विषय है।

अब यह देखना बाकी है कि क्या वर्तमान सरकार जवाबदेही की दिशा में ठोस कदम उठाती है, या यह मामला भी पूर्ववर्ती सरकारों की तरह सुविधा और सिफारिश के खेल में दबा दिया जाएगा।

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