बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल में सुशासन का सूर्योदय: तिमेनार में पहली बार पहुंची बिजली

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बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल में सुशासन का सूर्योदय:  तिमेनार में पहली बार पहुंची बिजली

रायपुर, 23 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के अति सुदूर गांव तिमेनार में इतिहास रचते हुए मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना के तहत पहली बार बिजली पहुंची है। आजादी के 77 साल बाद इस गांव में रोशनी की किरणें पहुंचने से ग्रामीणों में नई ऊर्जा और उमंग का संचार हुआ है। यह न सिर्फ विकास की ओर एक अहम कदम है, बल्कि माओवादी आतंक के अंधकार को चीरते हुए शांति और समृद्धि की दिशा में बढ़ता हुआ परिवर्तन भी है।

अंधकार से उजाले की ओर – तिमेनार की नई पहचान

बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेचापाल के आश्रित गांव तिमेनार के निवासी दशकों से बिजली की रोशनी से वंचित थे। भय और असुरक्षा के बीच जीवनयापन कर रहे ग्रामीणों को अब इस नई सुविधा के चलते सुरक्षा, शिक्षा और विकास की राह पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

गांव के 53 घरों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जिससे पूरे गांव में जश्न का माहौल है।

ग्रामीणों की जुबानी – "अब डर नहीं, सिर्फ उजाला!"

तिमेनार के निवासी मशराम, पंडरु कुंजाम, मंगली और प्रमिला वेको ने उत्साह के साथ बताया कि पहली बार गांव में बिजली पहुंची है।

"पहले रात का अंधेरा डरावना लगता था, लेकिन अब बिजली आने से न सिर्फ रोशनी मिली है, बल्कि हमारी जिंदगी भी बदल गई है। जंगली जानवरों, सांप-बिच्छुओं के खतरे से मुक्ति मिली है। अब हमारे बच्चे अच्छी तरह पढ़ाई कर सकते हैं और हम भी विकास की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।"

मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता – "हर गांव में पहुंचेगी विकास की किरण"

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश के हर मजरा-टोला को विद्युतीकरण से जोड़ने और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा,

"जहाँ कभी नक्सली आतंक का डर था, वहाँ आज विकास की रोशनी फैल रही है। यह परिवर्तन ही असली जीत है।"

तिमेनार में हुआ विद्युतीकरण सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि बस्तर के दूरस्थ अंचलों में सुशासन और विकास के नए युग की शुरुआत का संकेत है।

बुनियादी सुविधाओं का हो रहा विस्तार

विद्युतीकरण के साथ-साथ सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। तिमेनार अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि बस्तर में बदलाव की एक मिसाल बन चुका है। जहां पहले अंधकार और आतंक का बोलबाला था, वहीं अब बिजली की रोशनी, बच्चों की मुस्कान और विकास की रफ्तार देखने को मिल रही है।

यह बदलाव सिर्फ एक योजना की सफलता नहीं, बल्कि राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रशासन की सक्रियता और जनता के विश्वास का परिणाम है।

निष्कर्ष

तिमेनार में बिजली पहुंचना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह विकास, विश्वास और परिवर्तन का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि जब इरादे मजबूत होते हैं और नीतियाँ जन-केंद्रित होती हैं, तो कोई भी बाधा विकास के मार्ग को रोक नहीं सकती।

तिमेनार की यह रोशनी पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ में विकास की नई लहर का संकेत है।

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