तालाब बचाने उठी आवाज: 'समिति निष्क्रिय, नई उच्च स्तरीय टीम बने'

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तालाब बचाने उठी आवाज: 'समिति निष्क्रिय, नई उच्च स्तरीय टीम बने'

रायपुर के तालाबों की लगातार बिगड़ती हालत पर ENT विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. गुप्ता ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन एवं मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रायपुर की जिला वेटलैंड संरक्षण समिति को भंग करने और उसकी जगह वैज्ञानिकों वाली एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।

'तालाब मर रहे हैं, तो समिति किस काम की?'

डॉ. गुप्ता ने कहा कि वेटलैंड संरक्षण समिति के रहते ही तालाब खत्म होते जा रहे हैं। वर्षों से तालाबों की जांच नहीं की गई। जिन तीन तालाबों की जांच हुई भी, उनकी रिपोर्ट दबा दी गई। कलेक्टर समिति के अध्यक्ष और डीएफओ सदस्य सचिव होते हुए भी स्थिति नहीं सुधरी।

रिटेनिंग वॉल से रुकता है पानी, मरता है तालाब

डॉ. गुप्ता ने बताया कि तालाबों के चारों ओर बनाई जा रही रिटेनिंग वॉल्स जल रिसाव को रोक देती हैं। इसी कारण करबला समेत कई तालाब सूखने की कगार पर हैं। करबला तालाब के बीच की जैवविविधता और पक्षियों के प्राकृतिक घर को तोड़कर मूर्ति स्थापित करने की भी तैयारी है।

जांच अधूरी, रिपोर्ट गायब, काम जारी

उन्होंने बताया कि मई 2023 में सभी 2.25 हेक्टेयर या उससे बड़े तालाबों की जांच के आदेश दिए गए थे। लेकिन जुलाई में सिर्फ करबला, सेंध और झांझ तालाबों की सीमित जांच शुरू की गई, वह भी आधी अधूरी रही। हैरानी की बात है कि जांच के दौरान ही करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कर दिए गए। सेंध में 17 करोड़ और करबला में CSR फंड से 1.13 करोड़ के पक्के रास्ते बना दिए गए।

'HMFL' की अनदेखी, नियमों की धज्जियां

डॉ. गुप्ता ने कहा कि जांच समिति को तालाबों का उच्चतम जल स्तर (HMFL) निकालना था, ताकि तय किया जा सके कि 50 मीटर के दायरे में कोई निर्माण न हो। लेकिन इस पर कोई काम नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह रवैया जारी रहा तो रायपुर के सभी तालाब नक्शे से मिट जाएंगे।

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