तोमर बंधु की गिरफ्तारी पर उठे सवाल: दो महीने से फरार, पुलिस अब तक नाकाम अपराध पर रुपया भारी

Questions raised on Tomar brothers' arrest: absconding for one and a half month, police unsuccessful till now, money is more than crime तोमर बंधु गिरफ्तारी पर उठे सवाल: दो महीने से फरार, पुलिस अब तक नाकाम अपराध पर रुपया भारी
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तोमर बंधु की गिरफ्तारी पर उठे सवाल: दो महीने से फरार, पुलिस अब तक नाकाम अपराध पर रुपया भारी

तोमर बंधु गिरफ्तारी पर उठे सवाल: दो महीने से फरार, पुलिस अब तक नाकाम अपराध पर रुपया भारी

राजनीतिक संरक्षण या प्रशासनिक लापरवाही? जनता जानना चाहती है जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र तोमर और रोहित तोमर की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। दोनों अपराधी पिछले दो महीने से फरार हैं और इनके खिलाफ कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस अब तक इनकी गिरफ्तारी नहीं कर सकी है, जिससे लोगों में आक्रोश और संदेह दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

नगर निगम ने बीते दिनों तोमर बंधुओं के एक टीन से बने ऑफिस को ढहाकर कार्रवाई का दिखावा जरूर किया, लेकिन यह केवल “विजुअल इफेक्ट” बनकर रह गया। जनता इसे महज “वाहवाही लूटने का स्टंट” मान रही है, न कि कोई ठोस कार्रवाई।

सबको पता है लोकेशन, फिर भी पुलिस नाकाम — क्यों?

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है — जब आम लोगों को भी तोमर बंधुओं की लोकेशन की जानकारी है, तो पुलिस उन्हें पकड़ने में असफल क्यों साबित हो रही है?

क्या पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव है?

क्या अपराधियों को मिल रहा है राजनीतिक संरक्षण?

या फिर यह पूरी कार्रवाई केवल दिखावा है?

प्रदेश की जनता अब जानना चाहती है कि आखिर अपराधियों पर कब नकेल कसी जाएगी। कब तक पुलिस मूकदर्शक बनी रहेगी और अपराधी खुलेआम अपने कारोबार को संचालित करते रहेंगे?

गृह मंत्री की साख पर भी सवाल

गृह मंत्री विजय शर्मा ने बीते दिनों बयान दिया था कि “छत्तीसगढ़ में कोई भी अपराधी नहीं बचेगा, चाहे वह किसी भी राजनेता के साथ फोटो खिंचवा ले।”

लेकिन तोमर बंधुओं के मामले ने गृह मंत्री की इस बात को पूरी तरह झूठा साबित कर दिया है। अब जनता यह तक कहने लगी है कि "क्या तोमर बंधुओं को पकड़ने के लिए गृह मंत्री को कोई धनराशि दी गई है?"

इस तरह के सवाल अब सोशल मीडिया और जन चर्चाओं में आम हो गए हैं। पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

ब्याज का धंधा जारी, गुर्गे अब भी कर रहे वसूली

सूत्रों की मानें तो तोमर बंधु भले ही प्रदेश से बाहर हों, लेकिन उनका ब्याज का अवैध कारोबार अब भी जारी है। उनके गुर्गे छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं और लोगों को धमकी देकर ब्याज वसूल रहे हैं।

एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तोमर के लोगों की ओर से लगातार फोन आ रहे हैं और कहा जा रहा है कि “ब्याज देना ही पड़ेगा, चाहे कुछ भी हो।”

यह दिखाता है कि अपराधी फरार होकर भी बेखौफ हैं और पुलिस उन्हें रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।

मायने

तोमर बंधुओं की गिरफ्तारी सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि प्रशासन की साख, गृह मंत्री की विश्वसनीयता और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपनी छवि बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा या यह मामला भी “दबाव और संरक्षण” के दलदल में दबकर रह जाएगा।

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