Physiotherapists will not be able to write 'doctor' फिजियोथेरेपिस्ट नाम के आगे ‘डॉक्टर’ नहीं लिख सकेंगे, स्वास्थ्य महानिदेशालय ने जारी किया बड़ा निर्देश
फिजियोथेरेपिस्ट नाम के आगे ‘डॉक्टर’ नहीं लिख सकेंगे, स्वास्थ्य महानिदेशालय ने जारी किया बड़ा निर्देश
नई दिल्ली, सितम्बर 2025। फिजियोथेरेपिस्ट अब अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर (Dr.)’ नहीं लिख पाएंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय (Directorate General of Health Services – DGHS) ने इस संबंध में नया आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि फिजियोथेरेपिस्ट को मेडिकल डॉक्टर की उपाधि का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय ने इस आदेश की प्रति भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) को भी भेजी है। इसमें कहा गया है कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं होते, इसलिए उन्हें इस उपाधि का इस्तेमाल करने की अनुमति देना न तो उचित है और न ही कानूनी।
आदेश में क्या कहा गया?
महानिदेशालय ने कहा कि भारतीय चिकित्सा डिग्री अधिनियम, 1916 के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखता है तो यह अवैध है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय ने फिजियोथेरेपी की पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम से भी इस प्रावधान को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि फिजियोथेरेपिस्टों को एक सम्मानजनक लेकिन स्पष्ट उपाधि दी जा सकती है, ताकि मरीजों या आम जनता में कोई भ्रम न रहे।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद अप्रैल 2025 की उस अधिसूचना से जुड़ा है, जिसमें नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) ने फिजियोथेरेपिस्टों को अपने नाम के आगे ‘Dr.’ और नाम के बाद ‘PT’ लगाने की अनुमति दी थी।
इस फैसले के बाद इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन और अन्य संगठनों ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं और इस तरह की अनुमति मरीजों को गुमराह कर सकती है।
इसी आधार पर आईएमए ने भी स्वास्थ्य मंत्रालय से शिकायत दर्ज कराई और DGHS से हस्तक्षेप की मांग की।
अदालतों के पुराने फैसले
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा ने बताया कि अदालतें और मेडिकल काउंसिल पहले भी इस विषय पर स्पष्ट रुख अपना चुकी हैं।
2003 में पटना हाईकोर्ट ने कहा था कि फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर की उपाधि का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
2016 में तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल ने भी यही रोक लगाई।
2020 में बेंगलुरु की अदालत और
2022 में मद्रास हाईकोर्ट ने भी इस पर पाबंदी की पुष्टि की थी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि इन सभी निर्णयों के मद्देनज़र यह स्पष्ट है कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डॉक्टर शब्द नहीं लगा सकते। ऐसा करना इंडियन मेडिकल डिग्री एक्ट 1916 का सीधा उल्लंघन होगा।
फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका पर जोर
हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका स्वास्थ्य सेवाओं में बेहद महत्वपूर्ण है। पुनर्वास, शारीरिक चिकित्सा, खेलकूद से जुड़ी चोटों का उपचार और मस्कुलो-स्केलेटल विकारों में फिजियोथेरेपिस्ट अहम योगदान देते हैं। लेकिन उनकी पहचान को मेडिकल डॉक्टर के साथ भ्रमित नहीं किया जा सकता।
आगे की राह
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जल्द ही फिजियोथेरेपिस्टों के लिए एक अलग मानकीकृत उपाधि (standardized title) तय की जाएगी, जिससे उनकी पेशेवर पहचान मजबूत होगी लेकिन मरीजों को गुमराह करने की संभावना नहीं रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला फिजियोथेरेपी पेशे की गरिमा को बनाए रखते हुए मरीजों को सही और पारदर्शी जानकारी देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि मरीज और डॉक्टरों के बीच भरोसा भी मजबूत होगा।
मायने
केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय का यह आदेश फिजियोथेरेपिस्टों के पेशेवर कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ‘डॉक्टर’ शब्द के दुरुपयोग को रोकने का प्रयास है। आने वाले समय में यदि फिजियोथेरेपिस्टों को अलग उपाधि दी जाती है तो यह न केवल उनकी पहचान स्पष्ट करेगी बल्कि मरीजों को भी उपचार से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराएगी।
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