Naan scam: Former IAS Alok Shukla arrested, ED raid नान घोटाले में बड़ा एक्शन: पूर्व IAS आलोक शुक्ला गिरफ्तार, ED की छापेमारी से हड़कंप
नान घोटाले में बड़ा एक्शन: पूर्व IAS आलोक शुक्ला गिरफ्तार, ED की छापेमारी से हड़कंप
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रह चुके और खाद्य विभाग के तात्कालीन सचिव रहे डॉ. आलोक शुक्ला के भिलाई स्थित निवास पर छापा मारा। सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने शुरुआती पूछताछ के बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर लिया है और जल्द ही उन्हें ईडी कोर्ट में पेश किया जाएगा।
यह कार्रवाई उस समय और भी अहम मानी जा रही है क्योंकि महज एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा डॉ. आलोक शुक्ला और एक अन्य वरिष्ठ IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था।
सुबह-सुबह पहुंची ईडी की टीम
जानकारी के अनुसार, तड़के सुबह ईडी की टीम अचानक भिलाई स्थित आलोक शुक्ला के घर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई थी। ईडी अधिकारियों का दावा है कि जांच के दौरान मिले सबूतों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। ईडी का मानना है कि आलोक शुक्ला की भूमिका नान घोटाले की पूरी साजिश में गहरी रही है।
नान घोटाला क्या है?
नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले का खुलासा वर्ष 2015 में हुआ था। आरोप है कि खाद्यान्न वितरण से जुड़ी योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और करोड़ों रुपये की अनियमितता सामने आई। उस समय डॉ. आलोक शुक्ला खाद्य विभाग के सचिव के पद पर तैनात थे।
दिसंबर 2018 में इस मामले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) ने आलोक शुक्ला और अन्य अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। इसके बाद 2019 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से उन्हें और अनिल टुटेजा को अग्रिम जमानत मिल गई थी।
भूपेश बघेल सरकार में मिली ताकतवर पोस्टिंग
अग्रिम जमानत मिलने के बाद आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को तत्कालीन कांग्रेस सरकार में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं। आलोक शुक्ला लंबे समय तक शिक्षा विभाग सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज रहे।
विपक्ष ने लगातार आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने इन अधिकारियों को न सिर्फ बचाया बल्कि उन्हें शक्तिशाली पद देकर जांच को प्रभावित करने का मौका भी दिया। यही कारण था कि नान घोटाले की जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई और कई गवाहों व सबूतों पर सवाल उठे।
पूर्व महाधिवक्ता पर भी कार्रवाई
नान घोटाले से जुड़े एक अन्य पहलू में ईडी ने पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने इस पूरे मामले में अफसरों को संरक्षण देने की कोशिश की। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए साफ कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में अभियुक्तों को राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट के इस आदेश के अगले ही दिन ईडी की टीम ने एक्शन लेते हुए आलोक शुक्ला के घर दबिश दी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की।
आगे क्या?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब नान घोटाले की जांच की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। ईडी की इस कार्रवाई से उन सभी लोगों पर दबाव बढ़ेगा जिन पर जांच एजेंसियों ने संदेह जताया है। वहीं, विपक्ष ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा है कि यह “भ्रष्टाचार के खिलाफ सच्ची लड़ाई” की शुरुआत है।
दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई “राजनीतिक प्रतिशोध” है और केंद्र सरकार अपने विरोधियों को दबाने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रही है।
मायने
नान घोटाला लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में चर्चा का विषय रहा है। आलोक शुक्ला की गिरफ्तारी इस केस में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में ईडी की जांच किन-किन बड़े चेहरों तक पहुंचती है और राज्य की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।
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