सरकारी आदेशों की उड़ाई धज्जियाँ: कोरबा में अधिग्रहित भूमि की अवैध रजिस्ट्री का पर्दाफाश
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो न केवल सरकारी आदेशों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे प्रशासनिक तंत्र में नियमों को दरकिनार कर अपने लाभ के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। अधिग्रहित भूमि की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद इसकी रजिस्ट्री की अनुमति देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है।
मुख्य घटनाक्रम:
कोरबा जिले में ग्राम रतलिया की जमीन एसईसीएल की कोयला खदान के लिए अधिग्रहित की गई थी। अधिग्रहण के बाद उस भूमि की खरीद-बिक्री पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बावजूद उप पंजीयक ने भूमि के टुकड़े कर बिक्री की अनुमति दे दी। यह सरकारी दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
जैसे ही इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ, कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उप पंजीयक को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि उत्तर असंतोषजनक पाया गया तो एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रभाव और गंभीरता:
यह मामला यह दर्शाता है कि किस प्रकार सरकारी आदेशों को दरकिनार कर स्थानीय अधिकारियों द्वारा नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यह न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। अधिग्रहित भूमि की अवैध बिक्री भविष्य में और विवादों को जन्म दे सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0