जस्टिस वर्मा के दिल्ली बंगले में 'कैश स्टोररूम' का खुलासा: जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगने की घटना के बाद, एक जांच पैनल ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिस स्टोररूम में जली हुई नकदी मिली, वह जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के "सक्रिय नियंत्रण" में था।
🔥 आग और नकदी का रहस्य
14 मार्च की रात, दिल्ली के तुगलक क्रेसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाते समय स्टोररूम में जली हुई ₹500 की नोटों की गड्डियाँ पाईं। गवाहों के अनुसार, नोटों का ढेर लगभग 1.5 फीट ऊँचा था, जो कमरे के दरवाजे से लेकर दीवार तक फैला हुआ था।
🕵️♂️ जांच पैनल की प्रमुख बातें
स्टोररूम केवल जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों की पहुँच में था।
आग लगने के बाद, 15 मार्च की सुबह, घरेलू स्टाफ ने जली हुई नकदी को हटाया।
कमरे में एक शराब की अलमारी थी, जो आग को और भड़काने का कारण बनी।
जांच में 50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें दिल्ली पुलिस आयुक्त और दमकल विभाग के प्रमुख शामिल थे।
⚖️ आगे की कार्रवाई
जांच समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसमें जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की गई है।
इस मामले ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना है कि संसद इस पर क्या रुख अपनाती है।
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