क्या धार्मिक स्थलों के साथ हो रहा है भेदभाव? मठ–मंदिरों के संरक्षण पर रायपुर में होगा विशेष व्याख्यान
क्या धार्मिक स्थलों के साथ हो रहा है भेदभाव? मठ–मंदिरों के संरक्षण पर रायपुर में होगा विशेष व्याख्यान
“जब मंदिरों पर हो नियंत्रण, तो मस्जिद–चर्च क्यों रहें मुक्त?” – समाज के मन में उठ रहे सवाल, रायपुर में होगी गूंज
रायपुर, 19 जुलाई 2025 (शनिवार): भारत में धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। विशेष रूप से मठों और मंदिरों के संचालन, संपत्ति नियंत्रण और सरकारी हस्तक्षेप पर अनेक सवाल खड़े होते रहे हैं। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों का मानना है कि जहां एक ओर मंदिरों की आय और संपत्तियों पर सरकार का सीधा नियंत्रण रहता है, वहीं दूसरी ओर मस्जिदों, चर्चों और अन्य धार्मिक स्थलों को इस प्रकार के कानूनी ढांचे में नहीं लाया गया है।
इन्हीं सवालों और चिंताओं को केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ मठ मंदिर विकास समिति, टाटीबंध द्वारा रायपुर में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश में सभी धार्मिक संस्थानों के लिए समान कानून की आवश्यकता पर चर्चा करना और मठ–मंदिरों के संरक्षण की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाना है।
डॉ. कौशल कान्त मिश्रा होंगे मुख्य वक्ता
इस व्याख्यान में दिल्ली से पधारे प्रख्यात वक्ता और सामाजिक चिंतक डॉ. कौशल कान्त मिश्रा मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखेंगे। वे धार्मिक स्वतंत्रता, सरकारी नियंत्रण और संविधान में वर्णित समानता के सिद्धांतों पर रोशनी डालते हुए यह सवाल उठाएंगे कि “क्या धार्मिक स्थलों के साथ भारत में समान व्यवहार हो रहा है?”
विशिष्ट अतिथि भी होंगे उपस्थित
इस कार्यक्रम में अनेक गरिमामयी अतिथि भी शामिल होंगे, जिनमें प्रमुख हैं:
नंदन जैन – प्रदेश कोषाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़
राजेश मिश्रा – पूर्व आईपीएस अधिकारी
डॉ. विजय शंकर मिश्रा – प्रदेश संयोजक, सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ
कार्यक्रम विवरण
📅 तिथि: 19 जुलाई 2025, शनिवार
🕓 समय: शाम 4:00 बजे से रात 7:00 बजे तक
📍 स्थान: श्री राम मंदिर परिसर हॉल, रायपुर (छत्तीसगढ़)
समिति की सक्रिय भूमिका
इस आयोजन का नेतृत्व समिति अध्यक्ष संजय कोपुलवार कर रहे हैं। उनके साथ वात्सल्य मूर्ति, मुकेश तिवारी (उपाध्यक्ष), वैष्णव वैष्णव (सचिव), मनीष श्रीवास्तव व अंकित द्विवेदी (सह सचिव) और प्रवीण मिश्रा, आलोक मंडी, मंजुल मयंकर श्रीवास्तव जैसे सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
क्या चाहिए सभी धार्मिक संस्थानों के लिए समान कानून?
यह व्याख्यान उस व्यापक बहस को स्वर देगा जो वर्षों से चली आ रही है—जब मंदिरों की संपत्ति सरकारी नियंत्रण में हो सकती है, तो मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक संस्थानों को इससे बाहर क्यों रखा गया है? क्या भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में यह दोहरा मापदंड नहीं है?
समिति ने स्पष्ट कहा है कि यह कार्यक्रम किसी धर्म या सम्प्रदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी धार्मिक संस्थानों के लिए समान कानून और समान जवाबदेही की मांग को लेकर है।
जनता से अपील
समिति ने आम नागरिकों, धर्मप्रेमियों और बुद्धिजीवियों से अपील की है कि वे सपरिवार इस कार्यक्रम में भाग लें, अपने विचार रखें और इस सामाजिक विमर्श को एक सार्थक दिशा दें। यह आयोजन केवल मठ-मंदिरों की चिंता नहीं, बल्कि भारत की न्यायप्रिय और धर्मनिरपेक्ष आत्मा की भी चिंता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0