"आईएएस रानू साहू को तगड़ा झटका: हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत से किया इनकार, जेल में ही रहेंगी बंद!"

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"आईएएस रानू साहू को तगड़ा झटका: हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत से किया इनकार, जेल में ही रहेंगी बंद!"

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कोयला घोटाले में फंसी निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू की अग्रिम जमानत याचिका को सख्ती से खारिज कर दिया। इस फैसले से उनके जेल से बाहर आने की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद साफ हो गया कि रानू साहू को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?

रानू साहू पर आरोप है कि उन्होंने कोयला परिवहन में अवैध वसूली करने वाले कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी का साथ दिया। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जांच में खुलासा किया कि यह अवैध लेवी रैकेट 500 करोड़ रुपये से भी अधिक का है, जिसमें कई बड़े अधिकारियों और नेताओं के शामिल होने की बात सामने आई थी।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत याचिका?

रानू साहू की ओर से दलील दी गई थी कि उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि "गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।"

रानू साहू की संपत्तियों पर भी जांच की गाज!

 ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, रानू साहू और उनके परिवार ने अपनी आय से अधिक संपत्तियां अर्जित की हैं।

2015 से 2022 के बीच 24 से अधिक संपत्तियां खरीदी गईं।

 2011 से 2022 तक वेतन के रूप में केवल 92 लाख रुपये मिले, लेकिन संपत्तियां 3.93 करोड़ रुपये की हैं। ईडी ने उनकी 21.47 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर ली हैं। अब आगे क्या? रानू साहू के पास अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है, लेकिन ईडी का सख्त रुख देखते हुए वहां से राहत मिलना भी मुश्किल नजर आ रहा है।

 बेकसूर या भ्रष्टाचार की दोषी?

जहां उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है, वहीं ईडी का दावा है कि जांच में उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले ने उनके लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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