13 साल बाद किसानों को मिला न्याय: हाई कोर्ट ने बढ़ाया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार भूमि का मुआवजा

Farmers got justice after 13 years: High Court increased the compensation for Raipur airport expansion land13 साल बाद किसानों को मिला न्याय: हाई कोर्ट ने बढ़ाया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार भूमि का मुआवजा
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13 साल बाद किसानों को मिला न्याय: हाई कोर्ट ने बढ़ाया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार भूमि का मुआवजा

13 साल बाद किसानों को मिला न्याय: हाई कोर्ट ने बढ़ाया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार भूमि का मुआवजा

अब 25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेगा मुआवजा, ब्याज और अन्य लाभ भी मिलेंगे

रायपुर, 30 अगस्त 2025 – नया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने किसानों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि किसानों को अब 13 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के बजाय 25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाए।

मुख्य बातें:

मुआवजे की दर 13 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की गई

अतिरिक्त 12% वार्षिक ब्याज और 30% क्षतिपूर्ति राशि भी मिलेगी

आदेश के अनुसार, कब्जा लेने की तारीख से ब्याज भी देना होगा

फैसला हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच – जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद ने सुनाया

पीछे की कहानी: 2011 में अधिग्रहण, 2020 में याचिका

वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने नया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए बड़ौद और आसपास के गांवों की लगभग 95 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की थी। अधिसूचना अगस्त 2011 में जारी हुई और 2012 में किसानों को सिंचित और असिंचित भूमि के अनुसार 17 लाख और 18.25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया गया।

हालांकि, किसानों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए 2019 में संबंधित विभाग में पुनर्मूल्यांकन की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2020 में किसानों ने हाई कोर्ट में अपील की।

सरकारी एजेंसी ने खुद खरीदी थी ज़मीन ऊंचे दाम पर

किसानों की ओर से दलील दी गई कि एनआरडीए (NRDA) ने अधिग्रहण से पहले 2010 में उसी गांव में जमीन 35 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से खरीदी थी। इसके बावजूद किसानों को 17 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया गया, जो सरासर अन्यायपूर्ण था।

किसानों ने यह भी कहा कि उनकी जमीन सिंचित और हाईवे से सटी हुई है, जिससे इसकी कीमत और अधिक बनती है।

कोर्ट की टिप्पणी: भेदभाव अनुचित

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब सरकारी एजेंसियां खुद उसी क्षेत्र में अधिक दाम पर जमीन खरीद रही हैं, तो किसानों को कम दर पर मुआवजा देना भेदभावपूर्ण और अनुचित है। कोर्ट ने सभी अपीलों को स्वीकारते हुए भूमि का मूल्य 25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया और राज्य सरकार को ब्याज, क्षतिपूर्ति एवं अन्य संवैधानिक लाभों सहित मुआवजा देने का आदेश दिया।

न्याय की जीत, किसानों के चेहरे पर खुशी

यह फैसला लंबे समय से न्याय की राह देख रहे किसानों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें उचित मुआवजा और अन्य लाभ मिलेंगे, जिससे वे अपने भविष्य की योजना बेहतर ढंग से बना सकेंगे।

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