11 थानों की पुलिस की घेराबंदी के बाद भी नहीं पकड़ सकी कुख्यात तोमर बंधु, को राजनीतिक संरक्षण के आरोप
11 थानों की पुलिस की घेराबंदी के बाद भी नहीं पकड़ सकी कुख्यात तोमर बंधु, राजनीतिक संरक्षण के आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में कुख्यात अपराधी वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस दावा कर रही है कि दोनों भगोड़ों की तलाश में 11 थानों की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन हकीकत ये है कि महीनों की मशक्कत के बावजूद अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं।
आमजन और विपक्ष सवाल उठा रहे हैं कि पुलिस इन दोनों हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर आखिर इतनी मेहरबानी क्यों दिखा रही है? क्या इसके पीछे कोई सियासी दबाव है?
सिर्फ आम आदमी पर सख्ती, बड़े अपराधियों को संरक्षण!
जनता का कहना है कि अगर किसी मामूली अपराध में कोई आम आदमी फरार होता, तो पुलिस उसे ताबड़तोड़ दबिश देकर अब तक सलाखों के पीछे भेज चुकी होती। लेकिन करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराध में लिप्त तोमर बंधु खुलेआम घूम रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर ने पैसे और रसूख के दम पर राजनीतिक और पुलिस महकमे में पकड़ बना ली है। खबर है कि एक सीनियर आईपीएस अफसर से 2 करोड़ रुपये की डील कर दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर चल रहे मामलों में ‘ढिलाई’ का रास्ता भी बना लिया है।
अंडा ठेले से अरबपति बनने तक की कहानी
कभी रायपुर में अंडा ठेला लगाने वाले तोमर बंधु ने बैंकों को 200 करोड़ से ज्यादा का चूना लगाया। नई गाड़ियां फाइनेंस कर नेपाल में बेच दीं। फर्जी ठेके दिखाकर जेसीबी मशीनें लोन पर लेकर मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और राजस्थान भेज दी। इन पैसों से सट्टा कारोबार में निवेश कर अरबों रुपये बनाए।
इतना ही नहीं, उन्होंने कई लोगों को 20-25% ब्याज पर पैसा देकर फंसा लिया। सैकड़ों लोग उनकी धोखाधड़ी के शिकार हुए। कई तो आत्महत्या कर चुके हैं, तो कई परिवार शहर छोड़ने को मजबूर हो गए।
पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप
जनता और विपक्ष दोनों ही सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है और भाजपा सरकार में इन अपराधियों को खुला संरक्षण मिला है।
विपक्ष का दावा है कि प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा भी इस मामले में जानबूझकर ढिलाई बरत रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि तोमर बंधु ने मंत्री और अफसरों को भी अपने पैसे से साध लिया है।
पुलिस का दावा, जल्द गिरफ्तारी
इधर, रायपुर पुलिस का कहना है कि उनकी टीमें लगातार दोनों अपराधियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। रायपुर एसपी लाल उमेद सिंह ने दावा किया है कि जल्द ही वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
हालांकि अब सवाल उठ रहा है कि आखिर छत्तीसगढ़ पुलिस कब इन कुख्यात अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी? और क्या सरकार इन पर कार्रवाई के मामले में वाकई गंभीर है या रसूखदारों के आगे मजबूर?
आपकी राय
क्या आपको लगता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस और सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में बताएं।
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