Drug Inspector Action: भ्रामक विज्ञापनों और मिलावटी आयुर्वेदिक दवाओं पर सख्ती

इस केंद्र के कंट्रोलर प्रो. डॉ. हरिंद्र मोहन शुक्ला ने मीडिया को इस कार्यशाला की जानकारी दी। कार्यशाला का मुख्य विषय "औषधि गुणवत्ता संवर्धन" था।
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Drug Inspector Action: भ्रामक विज्ञापनों और मिलावटी आयुर्वेदिक दवाओं पर सख्ती

राज्य प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के आयुर्वेदिक ड्रग इंस्पेक्टर के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन छत्तीसगढ़ ड्रग्स टेस्टिंग लेबोरेट्री एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा किया गया। इस केंद्र के कंट्रोलर प्रो. डॉ. हरिंद्र मोहन शुक्ला ने मीडिया को इस कार्यशाला की जानकारी दी। कार्यशाला का मुख्य विषय "औषधि गुणवत्ता संवर्धन" था।

समयबद्ध औषधि सैंपल परीक्षण पर जोर

कार्यक्रम का शुभारंभ आयुष के संयुक्त संचालक डॉ. सुनील कुमार दास ने भगवान धन्वंतरि पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में ड्रग इंस्पेक्टर्स को तिमाही लक्ष्य के अनुसार औषधि सैंपल परीक्षण के लिए भेजने पर जोर दिया, ताकि पूरे वर्ष औषधि परीक्षण सुचारू रूप से किया जा सके और वर्ष के अंत में सैंपल भेजने की भीड़ से बचा जा सके।

नकली और मिलावटी दवाओं पर कानूनी कार्रवाई

सेवानिवृत्त विधि अधिकारी और अधिवक्ता ए. के. पांडेय ने Drugs and Cosmetics Act, 1940 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नकली, मिलावटी और ब्रांड नामों की धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई कैसे की जाए। फार्मेकोविजिलेंस विशेषज्ञ डॉ. मनोज दास ने भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों को अवैध बताते हुए उनके दुष्प्रभावों की जानकारी दी।

राज्य औषधि विश्लेषक डॉ. के. एस. करभाल और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के राज्य अनुज्ञापन अधिकारी बसंत कौशिक ने औषधि संग्रहण में सावधानियों की जानकारी दी, जिससे कानूनी प्रक्रिया में त्रुटियों से बचा जा सके। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. परमानंद वर्मा और ड्रग्स टेस्टिंग लेबोरेट्री के डॉ. नागेंद्र चौहान एवं अरुण परिहार ने भी महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिया।

उन्नत परीक्षण मानक

ड्रग्स टेस्टिंग लेबोरेट्री के कंट्रोलर डॉ. हरिंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि पहले केवल 15 पैरामीटर पर औषधियों का परीक्षण होता था, जबकि अब 45 से अधिक पैरामीटर पर परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को लैब की आधुनिक सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।

मिलावटी आयुर्वेदिक दवाओं और भ्रामक दावों पर कार्रवाई

कार्यशाला के अंतिम सत्र में संचालक आयुष इफ़्फ़त आरा, आई.ए.एस. ने बताया कि बाजार में डायबिटीज, अस्थमा, अर्थराइटिस जैसी बीमारियों की मिलावटी आयुर्वेदिक दवाएं बेचे जाने की सूचनाएं मिली हैं। उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर्स को निर्देश दिया कि वे संदेहास्पद दवाओं के नमूने जब्त कर जल्द से जल्द जांच करवाएं और Drug Inspector Action on Misleading Advertisements and Adulterated Ayurvedic Medicines के तहत विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

उन्होंने चमत्कारिक चिकित्सा दावों और भ्रामक विज्ञापनों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। कार्यशाला में ड्रग इंस्पेक्टर्स को संदेहास्पद औषधियों की पहचान, जब्ती प्रक्रिया और कानूनी दस्तावेजीकरण की विस्तृत जानकारी दी गई।

इस कार्यशाला में लैबोरेट्री विशेषज्ञ चंदन साहू, हरेकृष्ण सिन्हा, मिलिंद घोरे, सुषमा मिंज, आराधना तिवारी, सुभाष केरकेट्टा, प्रभावती गिरी सहित प्रदेशभर के आयुर्वेदिक ड्रग इंस्पेक्टर्स ने भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कमलिनी त्रिपाठी द्वारा किया गया।

यह पहल औषधि गुणवत्ता संवर्धन, उपभोक्ता सुरक्षा और Drug Inspector Action on Misleading Advertisements and Adulterated Ayurvedic Medicines के तहत बाजार में फैल रहे धोखाधड़ी वाले चिकित्सा दावों को नियंत्रित करने में सहायक होगी।

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