रायपुर सेंट्रल जेल में कांग्रेसी नेता पर प्राणघातक हमला, हालत नाजुक
रायपुर सेंट्रल जेल में कांग्रेसी नेता पर प्राणघातक हमला, हालत नाजुक
हमलावरों ने दी धमकी: “तुझे तो मारेंगे ही… के.के. श्रीवास्तव को भी जान से मार देंगे”
रायपुर, 18 जुलाई 2025 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार रात जेल के भीतर कांग्रेस से जुड़े विचाराधीन बंदी आशीष शिंदे पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
हमला उस समय हुआ जब रायपुर उत्तर युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष आशीष शिंदे और उनके करीबी के.के. श्रीवास्तव बैरक में लौट रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही शिंदे बैरक में प्रवेश करने वाले थे, तभी दो बंदियों—महेश रात्रे और जामवंत—ने उन पर ब्लेड और कटर से ताबड़तोड़ वार कर दिए।
हमले में आशीष शिंदे के चेहरे, गले और सीने पर गहरी चोटें आई हैं। उन्हें तुरंत रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताया है। अत्यधिक खून बहने के कारण उन्हें ICU में ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
हमलावरों ने दी खुली धमकी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर हमला करते समय चिल्ला रहे थे:
“तुझे तो मारेंगे ही… और के.के. श्रीवास्तव को भी जान से मार देंगे!”
इस हमले से के.के. श्रीवास्तव बाल-बाल बचे, जो हमले के दौरान बैरक के भीतर भागकर छिप गए थे। बताया जा रहा है कि हमलावरों का अगला निशाना वे ही थे।
दोनों बंदी एक ही केस में हैं आरोपी
गौरतलब है कि आशीष शिंदे और के.के. श्रीवास्तव एक ही मामले में विचाराधीन बंदी हैं। श्रीवास्तव पर करोड़ों की ठगी का आरोप है, जबकि शिंदे को उन्हें फरार कराने और छिपाने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल में रखा गया है और वे एक-दूसरे के बेहद करीबी माने जाते हैं।
जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस सुनियोजित हमले ने रायपुर सेंट्रल जेल की सुरक्षा पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं:
जेल के भीतर धारदार हथियार कैसे पहुंचे?
आदतन अपराधियों को ऐसे बंदियों के साथ क्यों रखा गया जिनकी जान को खतरा था?
क्या जेल अब अपराधियों के लिए सुरक्षित अड्डा बनती जा रही है?
क्या अगला निशाना के.के. श्रीवास्तव हैं?
हमलावरों की धमकियों और घटना की पृष्ठभूमि को देखते हुए जेल प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि के.के. श्रीवास्तव की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पुलिस व जेल प्रशासन द्वारा मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
सवाल यह है कि जब जेल के भीतर विचाराधीन बंदी सुरक्षित नहीं हैं, तब आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की जेलें संगठित अपराध का केंद्र बनती जा रही हैं।
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