छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों के लिए बने 38,471 टॉयलेट्स में 90% अनुपयोगी; 195 करोड़ खर्च के बावजूद 10,000 स्कूलों में अब भी शौचालय नहीं
छत्तीसगढ़ में दिव्यांग छात्रों के लिए बनाए गए शौचालयों की स्थिति चिंताजनक है। राज्य सरकार ने 195 करोड़ रुपये की लागत से 38,471 दिव्यांग-मैत्री टॉयलेट्स का निर्माण कराया, लेकिन इनमें से 90% टॉयलेट्स या तो अनुपयोगी हैं या कभी उपयोग में ही नहीं लाए गए। इसके बावजूद, राज्य के लगभग 10,000 सरकारी स्कूलों में अब भी दिव्यांग छात्रों के लिए शौचालयों की सुविधा नहीं है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही का आलम:
शौचालय निर्माण के लिए प्रति यूनिट 50,000 से 70,000 रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। हालांकि, कई स्थानों पर बिना मानकों के टॉयलेट्स बनाए गए, और संबंधित विभागों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कहीं टॉयलेट की टंकी नहीं है, कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है। कुछ स्कूलों में शिक्षक बताते हैं कि "फाइल में बना है, जमीन पर नहीं"।
दिव्यांग छात्रों की बेबसी:
दुर्ग जिले के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 6 की छात्रा पूजा, जो चलने में असमर्थ है, बताती है—"हर दिन स्कूल आने से डर लगता है, क्योंकि टॉयलेट तक पहुंच ही नहीं सकती। कई बार घर लौट जाती हूं।"
न्यायपालिका की सक्रियता:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्कूलों में शौचालयों की कमी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने कहा कि यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।
सरकार की प्रतिक्रिया:
राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और शौचालयों की मरम्मत व निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा।
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