धान बोने से पहले ही गड़बड़ाया गणित! छत्तीसगढ़ में डीएपी खाद की भारी किल्लत
खरीफ की बुवाई शुरू होने से पहले ही छत्तीसगढ़ के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की जबरदस्त कमी ने कृषि तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। राज्य में जहां दो लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत है, वहां महज 50 हजार मीट्रिक टन ही उपलब्ध है।
गांव-गांव में मचा हाहाकार
कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि किसान खाद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे बड़े जिलों में गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं। कुछ जगहों पर किसान खाली हाथ लौट रहे हैं।
कालाबाजारी की आशंका, कीमतें बेकाबू
इस कमी का फायदा उठाकर कुछ निजी दुकानदारों द्वारा मनमानी कीमत वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कृषि विभाग ने कालाबाजारी पर सख्ती से नजर रखने की बात कही है।
फसलों पर असर तय, किसान दुविधा में
धान की खेती के लिए डीएपी बेहद जरूरी है। इसके बिना फसल की जड़ें मजबूत नहीं होतीं। खाद नहीं मिली तो सीधे-सीधे उत्पादन पर असर पड़ेगा और किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सरकार की कोशिशें जारी, वैकल्पिक खाद की सलाह
राज्य सरकार ने केंद्र से और खाद की डिमांड भेजी है। साथ ही किसानों को एनपीके व अन्य उर्वरकों के इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही है। लेकिन अधिकतर किसान परंपरागत डीएपी पर ही भरोसा करते हैं
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