"Bureaucracy "2 साल में हावी हुई अफसरशाही! छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का साया"
"2 साल में हावी हुई अफसरशाही! छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का साया"
"Bureaucracy has taken over in 2 years! छत्तीसगढ़ में अफसरशाही का दबदबा: भाजपा सरकार पर बढ़ रहा भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बने लगभग दो साल पूरे होने को हैं। जिन उम्मीदों और भरोसे के साथ जनता ने प्रदेश में भाजपा को सत्ता सौंपी थी, वे उम्मीदें आज टूटती नजर आ रही हैं। कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनता तक, सबकी नाराजगी साफ झलक रही है। आरोप है कि प्रदेश में अफसरशाही हावी हो चुकी है और भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।
कार्यकर्ताओं और जनता में निराशा
भाजपा के कार्यकर्ता, जिन्होंने पार्टी को सत्ता दिलाने में दिन-रात मेहनत की, आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। अफसरों के सामने कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि विधायक और मंत्री तक बेबस नजर आते हैं।
नई-नई राजनीति में आए और पहली बार मंत्री बने चेहरों के पास न तो शासन का अनुभव है और न ही प्रशासन को दिशा देने का कौशल। ऐसे में अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। कई बार विधायक और मंत्री की बातों को अधिकारी सीधे नकार देते हैं। इससे न केवल सरकार की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर सवाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री सरल और सीधे हैं, लेकिन उनके आसपास बैठे कुछ अधिकारी स्थिति का गलत चित्रण कर उन्हें गुमराह कर रहे हैं। इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री निवास और मंत्रालय में इतनी मजबूत पकड़ बना ली है कि बिना उनकी सहमति के कोई भी काम नहीं हो पाता।
सूत्रों का कहना है कि बड़े स्तर पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। हर विभाग में मनमाने तरीके से निर्णय लिए जा रहे हैं। कलेक्टर स्तर से लेकर छोटे अधिकारी तक, अधिकांश काम पैसों के दम पर ही निपटाए जा रहे हैं।
कांग्रेस से भी ज्यादा भ्रष्टाचार का आरोप
प्रदेश की जनता ने कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार को भ्रष्टाचार के कारण सत्ता से बाहर किया था। उस समय यह कहा जा रहा था कि कांग्रेस को बहुमत मिला था और वह 15 साल का कार्यकाल आसानी से पूरा कर सकती थी। लेकिन अफसरशाही और भ्रष्टाचार के बोझ ने कांग्रेस को पांच साल में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया।
अब जनता का आरोप है कि भाजपा सरकार में कांग्रेस से भी पाँच गुना ज्यादा भ्रष्टाचार हो रहा है। छोटे-छोटे कामों के लिए भी जनता को अफसरों की चौखट पर पैसा चढ़ाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आज चुनाव हो जाएं तो भाजपा को 10 सीटें जीतना भी मुश्किल हो सकता है।
पत्रकारों में भी असंतोष
पत्रकार जगत में भी सरकार को लेकर गहरी नाराजगी है। संवाद और समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है। मुख्यमंत्री निवास से जुड़े जनसंपर्क विभाग के कुछ बड़े अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। पत्रकारों की बातों को न केवल नजरअंदाज किया जा रहा है, बल्कि जो पत्रकार सरकार की गलतियों को उजागर करने की कोशिश करते हैं, उन्हें किनारे कर दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर लगातार जनसंपर्क विभाग और उसके प्रमुख अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर आलोचना हो रही है। पत्रकारों का मानना है कि यदि सरकार और मीडिया के बीच संवादहीनता बढ़ी तो जनता तक सही संदेश पहुंचना मुश्किल हो जाएगा और सरकार की छवि और भी खराब होगी।
मंत्रालय और विभागों में अफसरों की पकड़
मंत्रालय से लेकर इंद्रावती और महानदी भवन तक, हर जगह अफसरशाही का दबदबा साफ झलकता है। अधिकारी अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं और मंत्रियों को भी दरकिनार किया जा रहा है। आरोप है कि कई विभागों में तो अफसरों ने कमीशन की दरें तक तय कर दी हैं।
पटवारी, तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक, हर स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ रही हैं। आम जनता को किसी भी काम के लिए अफसरों की जेब भरनी पड़ रही है। यह स्थिति भाजपा की उस छवि के बिल्कुल विपरीत है जो उसने चुनाव प्रचार के दौरान जनता के सामने प्रस्तुत की थी।
भाजपा नेतृत्व पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को लेकर खड़ा हो रहा है। आखिर क्यों राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं की नजर इस गंभीर समस्या पर नहीं पड़ रही? कार्यकर्ताओं और जनता की नाराजगी अगर इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में भाजपा के लिए सत्ता बचाना बेहद कठिन हो जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी टीम ने इस स्थिति पर काबू नहीं पाया, तो भाजपा को 2028 में जनता का भरोसा खोना पड़ सकता है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस को कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं होगी, जनता खुद ही भाजपा से नाराज होकर कांग्रेस को सत्ता सौंप देगी।
नतीजा
छत्तीसगढ़ की मौजूदा तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। जनता त्राहिमाम कर रही है, कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, पत्रकार असंतुष्ट हैं और अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है। भाजपा ने जिस विश्वास और पारदर्शिता की बात कहकर जनता से वोट मांगे थे, वह वादे कहीं खोते नजर आ रहे हैं।
अगर भाजपा नेतृत्व ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी और अनुभवी नेताओं को आगे नहीं लाया, तो यह सरकार भी कांग्रेस की तरह भ्रष्टाचार के बोझ तले दबकर गिर सकती है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति का भविष्य इसी बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा अफसरशाही को नियंत्रित कर पाती है या नहीं।
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