बिरगांव अस्पताल की लापरवाही ने छीनी माँ की ममता: 12 घंटे में नवजात बच्ची से छिन गया माँ का साया
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था बर्बाद बिरगांव अस्पताल की लापरवाही ने छीनी माँ की ममता: 12 घंटे में नवजात बच्ची से छिन गया माँ का साया
रायपुर, 11 जून 2025 — छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बिरगांव क्षेत्र से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। राज्य की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाही ने एक नवजात बच्ची से उसकी माँ का साया छीन लिया। यह घटना प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जानिए क्या है पूरा मामला
24 वर्षीय साक्षी नामक महिला को डिलीवरी के लिए बिरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। बच्ची के जन्म के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। डिलीवरी के 6-7 घंटे बाद साक्षी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में न तो कोई महिला डॉक्टर मौजूद थी और न ही कोई सीनियर मेडिकल स्टाफ। जिस डॉक्टर उपाध्याय की नाइट ड्यूटी लगी थी, वो स्वयं चलने-फिरने में असमर्थ और मानसिक रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। अस्पताल में एकमात्र पुरुष स्टाफ नर्स मौजूद था, जो दरवाजा बंद कर सो रहा था।
गंभीर हालात के बाद भी लापरवाही
परिजनों ने कई बार स्टाफ नर्स को उठाने की कोशिश की, लेकिन हर बार वह कुछ देर के लिए आता और फिर धमका कर चला जाता। अंततः बेसुध साक्षी को पानी पिलाया गया और एक इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों का आरोप है कि पानी सांस की नली में फंस गया, जिसके बाद साक्षी की हालत और ज्यादा बिगड़ गई।
कुछ ही देर में साक्षी ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद भी स्टाफ नर्स द्वारा परिजनों को अपशब्द कहे गए। यहाँ तक कि ‘नौटंकी कर रही है’ जैसे अमानवीय शब्द भी कहे गए।
दो महीने में दूसरी बड़ी लापरवाही
गौरतलब है कि बिरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में यह कोई पहली घटना नहीं है। दो महीने पहले भी नसबंदी के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। साथ ही प्रसव के बाद वसूली की शिकायतें भी लगातार मिलती रही हैं।
परिजन न्याय की मांग पर अड़े
परिजनों का कहना है कि एक नवजात बच्ची जिसने अभी तक ठीक से आँखें भी नहीं खोली थी, उसके सिर से माँ का साया छीन लिया गया। परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
स्वास्थ्य मंत्री से उठे सवाल
इस घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री पर भी सवाल उठ रहे हैं। बिरगांव की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और स्टाफ की अमानवीयता ने पूरे विभाग की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। लोग कह रहे हैं —
"अब तो मंत्री जी को आंखें खोल लेनी चाहिए। ये हाल रहा तो और कितनी माओं की गोद सूनी होगी?"
जिम्मेदार कौन?
ड्यूटी पर अनुपस्थित डॉक्टर उपाध्याय
लापरवाह स्टाफ नर्स
अस्पताल प्रबंधन
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था
प्रशासन की लीपापोती पर भी सवाल
अक्सर ऐसी घटनाओं में कार्रवाई के नाम पर लीपापोती होती है। लेकिन इस बार परिजनों और बिरगांववासियों ने कहा है कि अगर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करेंगे।
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