छत्तीसगढ़ में बड़ी लापरवाही: पैरासिटामॉल 500 एमजी दवा पाई गई अमानक, उपयोग पर रोक
छत्तीसगढ़ में बड़ी लापरवाही: पैरासिटामॉल 500 एमजी दवा पाई गई अमानक, उपयोग पर रोक
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) की एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। अंबेडकर अस्पताल, डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, रायपुर के स्वास्थ्य केंद्रों और बलौदाबाजार के अस्पतालों में उपयोग हो रही पैरासिटामॉल 500 एमजी टैबलेट को अमानक गुणवत्ता का पाया गया है। इसके बाद तुरंत इस दवा के उपयोग पर रोक लगा दी गई है।
आदेश के अनुसार, यह दवा 9एम इंडिया लिमिटेड द्वारा जनवरी 2024 में निर्मित की गई थी, जिसकी एक्सपायरी 31 दिसंबर 2025 है। यानी इसे बने 20 महीने से अधिक समय हो चुका है। आशंका जताई जा रही है कि इस दौरान दवा का बड़ा हिस्सा पहले ही मरीजों को दे दिया गया होगा। फिलहाल अस्पतालों से बचे हुए स्टॉक को वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल
माना जा रहा है कि यह प्रशासन की बड़ी चूक है। अमानक दवा मरीजों को वितरित किए जाने से लोगों की जान पर गंभीर खतरा पैदा हो गया। हालांकि अब तक इससे हुई संभावित मौतों या स्वास्थ्य हानि का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य में नकली और घटिया दवाओं का एक बड़ा रैकेट सक्रिय है। यह मामला उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जांच तब की गई जब दवा का अधिकांश स्टॉक खत्म हो चुका था।
भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप
इस घटना ने CGMSC और चिकित्सा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि—
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो।
मरीजों को हुए संभावित नुकसान की भरपाई की जाए।
अमानक दवा सप्लाई के पीछे के भ्रष्टाचार और मिलीभगत का पर्दाफाश हो।
छत्तीसगढ़ में यह घटना एक बार फिर मेडिकल सप्लाई सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान छोड़ गई है।
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