टाटा को जुर्माने से बचाने 6 महीने पुरानी कंपनी को 275 करोड़ की डील
भारतनेट परियोजना फेज-2 में बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें सरकारी प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं। चिप्स (CHiPS - Chhattisgarh Infotech Promotion Society) द्वारा संचालित इस परियोजना में, टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर समय पर कार्य न करने के चलते 12% जुर्माना लगाया गया था। इस जुर्माने के अंतर्गत हर बिल पर 12% राशि काटी जा रही थी और करीब 28 करोड़ रुपए की वसूली भी हो चुकी थी।
लेकिन तत्कालीन चिप्स के सीईओ समीर विश्नोई ने बाद में यह पूरी जुर्माने की राशि टाटा को वापस लौटा दी। इतना ही नहीं, अपने कार्यकाल में लगभग 1400 करोड़ रुपए का भुगतान भी टाटा प्रोजेक्ट्स को कर दिया गया। इसी अवधि में एक नई शेल कंपनी "गैलेक्सी सेनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (जीएसपीएल)" अस्तित्व में आई।
जीएसपीएल को मार्च 2019 में बनाया गया था और टाटा ने इस कंपनी को सितंबर तक 275 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया। खास बात यह है कि यह कंपनी टाटा पर लगे पेनल्टी को बचाने में मुख्य भूमिका निभा रही थी।
छह महीने पहले बनी इस कंपनी को 10 हजार किलोमीटर की ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाने का कार्य सौंपा गया था। करार में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि यदि टाटा किसी भी तरह से चिप्स की पेनल्टी से बचना चाहता है, तो वह इसी कंपनी के माध्यम से भुगतान करेगा।
यह मामला सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध वित्तीय चालबाज़ी प्रतीत होती है। इससे न सिर्फ सरकारी पैसे का दुरुपयोग हुआ, बल्कि देश की एक महत्त्वपूर्ण डिजिटल परियोजना की पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0