A grateful nation salutes former Prime Minister पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र का नमन : कांग्रेस ने किया याद
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र का नमन : कांग्रेस ने किया याद
रायपुर। पूर्व प्रधानमंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर पूरे देशभर में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। इस अवसर पर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि मनमोहन सिंह जैसा प्रधानमंत्री होना किसी भी देश के लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने भारत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संस्थागत मजबूती, आर्थिक तरक्की और विकास की तेज़ रफ्तार दी। करोड़ों गरीबों को गरीबी की दलदल से निकालने वाले, मध्यवर्ग को अपने घर और कार का सपना पूरा करने का अवसर देने वाले और बच्चों की आंखों में सुनहरे भविष्य का ख्वाब जगाने वाले डॉ. सिंह भारत के सच्चे हीरो थे।
विकास उपाध्याय ने गिनाईं उपलब्धियां
उपाध्याय ने बताया कि एक विद्वान प्रोफेसर, शानदार अर्थशास्त्री और दूरदर्शी नेता के रूप में मनमोहन सिंह युगों-युगों तक याद किए जाएंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए, जिनका असर आने वाली पीढ़ियों तक रहेगा।
प्रमुख उपलब्धियां:
आर्थिक उदारीकरण (1991): वित्त मंत्री रहते हुए भारत को उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की दिशा में आगे बढ़ाया।
सूचना का अधिकार (2005): जनता को पारदर्शिता और जवाबदेही का सशक्त हथियार दिया।
मनरेगा (2005): ग्रामीण गरीबों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी।
शिक्षा का अधिकार कानून (2009): हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा।
परमाणु समझौता (2008): अमेरिका के साथ ऐतिहासिक परमाणु करार कर ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा दी।
भोजन का अधिकार कानून (2013): गरीब परिवारों को सस्ते दर पर राशन सुनिश्चित किया।
भूमि अधिग्रहण कानून (2013): प्रभावित लोगों को उचित मुआवजे का अधिकार।
वन अधिकार कानून (2006): आदिवासियों को पारंपरिक भूमि अधिकार दिलाए।
चंद्रयान मिशन (2008): भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
महिला सशक्तिकरण: महिला आरक्षण बिल प्रस्तुत किया और स्वास्थ्य योजनाएं लागू कीं।
"सादगी और सौम्यता उनकी पहचान"
विकास उपाध्याय ने कहा कि मनमोहन सिंह जितने बड़े नेता थे, उससे भी बड़े इंसान थे। उनकी खामोशी बोलती थी और उनकी सरलता विरोधियों के शोर को भी शांत कर देती थी। लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ऐसी थी कि कोई भी व्यक्ति उनकी आलोचना कर सकता था, मजाक उड़ा सकता था, लेकिन वे कभी बुरा नहीं मानते थे।
"आज भी जीवित है उनकी सोच"
उपाध्याय ने भावुक होकर कहा –
> “मनमोहन सिंह को अगर देखना हो तो गरीबों की रोटी में, मेहनतकश मजदूर की नींद में, बच्चों के सपनों में और देश की तरक्की की रफ्तार में देखा जा सकता है। उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा।”
आज उनकी जयंती पर पूरा राष्ट्र उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित कर याद कर रहा है।
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