“Tandula reservoir in trouble! “ताँदुला जलाशय पर संकट! वेटलैंड में रिसॉर्ट, गंदा पानी और किसानों की प्यास”

“ताँदुला जलाशय पर संकट! वेटलैंड में रिसॉर्ट, गंदा पानी और किसानों की प्यास”
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“Tandula reservoir in trouble!   “ताँदुला जलाशय पर संकट! वेटलैंड में रिसॉर्ट, गंदा पानी और किसानों की प्यास”

ताँदुला जलाशय विवाद: वेटलैंड में रिसॉर्ट, गंदा पानी और किसानों की चिंता

बालोद। छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण ताँदुला जलाशय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। जलाशय का वेटलैंड एरिया, जो प्राकृतिक संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद अहम माना जाता है, अब अवैध निर्माण और गंदे पानी की निकासी की वजह से चर्चा का विषय बन गया है। यहाँ बने एक ईको फ्रेंडली रिसॉर्ट से निकलने वाला गंदा पानी सीधे जलाशय में पहुँच रहा है, जबकि यही पानी पूरे बालोद शहर की निस्तारी आवश्यकताओं को पूरा करता है।

इस मामले को लेकर भाजपा नेता मधुकांत यदु ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री, जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कलेक्टर से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि ताँदुला जलाशय और ताँदुला नदी के अस्तित्व को बचाना अब समय की बड़ी ज़रूरत है।

किसानों और आमजन को पानी की मार

मधुकांत यदु का आरोप है कि रिसॉर्ट को बचाने और उसके संचालन के नाम पर जलाशय से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। इसका सीधा असर आने वाले गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता पर पड़ेगा। उनका कहना है कि ताँदुला बांध का पानी स्वाभाविक रूप से ओवरफ्लो होकर आसपास के तालाबों, कुओं और स्टॉप डेम में जाता है। ऐसा होने पर भूजल स्तर बना रहता है और किसानों को हर साल नई बोरिंग करवाने में लाखों रुपए खर्च नहीं करने पड़ते।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह जलाशय का पानी बेमतलब छोड़ा जाता रहा, तो गर्मी की फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा और किसान गंभीर संकट में आ जाएंगे।

रिसॉर्ट का गंदा पानी पहुँचा जलाशय तक

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि रिसॉर्ट से निकलने वाला गंदा पानी सीधे जलाशय में गिर रहा है। यह स्थिति केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण बालोद शहर के लिए भी खतरे का संकेत है। शहरवासी इसी जलाशय पर निस्तारी के लिए निर्भर हैं।

यदु ने प्रशासन से मांग की है कि रिसॉर्ट प्रबंधन को निस्तारी हेतु अलग सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक किसानों से संबंधित नक्शा, खसरा और बी-1 जैसे राजस्व दस्तावेज़ नहीं मंगाए जाते, तब तक जलाशय से पानी न छोड़ा जाए।

बेमेतरा के लिए छोड़ा गया 100 क्यूसेक पानी

इधर जल संसाधन विभाग का कहना है कि बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक में अल्प वर्षा की वजह से किसानों की मांग पर ताँदुला जलाशय का मुख्य गेट बुधवार को खोला गया। इसके जरिए करीब 100 क्यूसेक पानी नहरों से खेतों तक पहुँचाया गया है।

कुछ दिन पहले सेलूद के पास माइनर टूट जाने की वजह से गेट को बंद कर दिया गया था, लेकिन उसकी मरम्मत के बाद फिर से पानी छोड़ा गया है। विभाग का तर्क है कि यह कदम किसानों की तात्कालिक मांग को देखते हुए उठाया गया है।

वेटलैंड एरिया में रिसॉर्ट, अनुमति पर सवाल

जानकारी के मुताबिक ताँदुला जलाशय क्षेत्र में जहाँ रिसॉर्ट का निर्माण हुआ है, वह क्षेत्र वास्तव में वेटलैंड है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और पर्यावरण विभाग के नियमों के मुताबिक ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण वर्जित है।

इसके बावजूद यहाँ पहले मुरुम की खुदाई कराई गई और बाद में भवनों का निर्माण कर दिया गया। अब बड़ा सवाल यह है कि इस निर्माण को अनुमति आखिर किसने दी? और उस समय संबंधित अधिकारी कहाँ थे?

पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि वेटलैंड में लगातार निर्माण होते रहे और गंदा पानी जलाशय में गिरता रहा, तो इसका असर केवल जलाशय की गुणवत्ता पर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा।

किसानों की बढ़ती नाराजगी

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है। जलाशय का पानी ही खेतों तक पहुँचकर सिंचाई की जरूरतें पूरी करता है। यदि यह पानी लगातार रिसॉर्ट और अन्य अवैध गतिविधियों की भेंट चढ़ता रहा, तो आने वाले समय में किसानों को हर सीजन में पानी की मार झेलनी पड़ेगी।

किसानों का कहना है कि ताँदुला जलाशय का निर्माण मूलतः कृषि सिंचाई और जन उपयोग के लिए हुआ था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल निजी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों और किसानों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते निगरानी रखी होती, तो वेटलैंड क्षेत्र में रिसॉर्ट का निर्माण संभव ही नहीं था। यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिरकार अनुमति की फाइल किसके स्तर पर पास हुई और जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप क्यों हैं?

लोगों का कहना है कि ताँदुला जलाशय का महत्व केवल बालोद ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के लिए भी है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही से लाखों लोगों के जीवन पर असर पड़ सकता है।

मायने

ताँदुला जलाशय विवाद अब केवल पर्यावरण और किसानों की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही का भी मुद्दा बन चुका है। वेटलैंड में बने रिसॉर्ट और उससे निकलने वाले गंदे पानी ने जलाशय की सुरक्षा और स्वच्छता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

किसानों और नागरिकों की चिंता सही है कि यदि जलाशय से पानी अनियंत्रित रूप से छोड़ा गया या उसमें गंदगी का प्रवाह जारी रहा, तो भविष्य में यह संकट और गहरा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और ताँदुला जलाशय तथा ताँदुला नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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