PM मोदी का तमिल कार्ड: "तमिल में सिग्नेचर से परहेज़ क्यों? मेडिकल पढ़ाई तमिल में होनी चाहिए ताकि गरीब भी डॉक्टर बन सके"
चेन्नई, 6 अप्रैल 2025:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भाषा के माध्यम से जनभावनाओं को छूने की कोशिश की है। तमिलनाडु के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए तमिल भाषा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “तमिल दुनिया की सबसे पुरानी और समृद्ध भाषाओं में से एक है। जब यह इतनी महान है, तो हम इसे अपनाने से क्यों कतराते हैं? लोग तमिल में सिग्नेचर करने से परहेज़ क्यों करते हैं?”
प्रधानमंत्री ने इस दौरान चिकित्सा शिक्षा को मातृभाषा में उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई तमिल जैसी स्थानीय भाषाओं में होनी चाहिए, ताकि गांव और गरीब का बच्चा भी डॉक्टर बनने का सपना साकार कर सके।
‘भाषा के अभिमान से विकास का रास्ता’
मोदी ने यह भी जोड़ा कि सरकार ने कई क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की कोशिश की है। इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे विषयों में अब हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी सहित कई भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।
राजनीतिक संकेत भी छुपे
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह ‘तमिल कार्ड’ 2026 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय गौरव के मुद्दों पर जनता को जोड़ना दक्षिण भारत में बीजेपी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है।
निष्कर्ष
पीएम मोदी की यह पहल न केवल भाषा को लेकर गौरव की भावना बढ़ाने वाली है, बल्कि इससे शिक्षा और अवसरों में समानता लाने की दिशा में भी एक ठोस कदम हो सकता है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहां भाषा अस्मिता का प्रमुख मुद्दा रही है, वहां यह संदेश गहरी पकड़ बना सकता है।
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