बिना मेहनत पैसा?’ – हाईकोर्ट को नहीं मंजूर, ऑनलाइन बेटिंग पर कड़ा रुख

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बिना मेहनत पैसा?’ – हाईकोर्ट को नहीं मंजूर, ऑनलाइन बेटिंग पर कड़ा रुख

नई दिल्ली: ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी के बढ़ते मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से सवाल किया है कि अब तक कितने ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है और इस पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, "आजकल लोग मेहनत से नहीं, शॉर्टकट से पैसा कमाना चाहते हैं।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ये ऐप्स खुलेआम इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, तो सरकारें इन्हें रोकने के लिए क्या कर रही हैं?

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को शपथ-पत्र दाखिल कर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग ऐप्स के खिलाफ कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं, किन-किन ऐप्स पर बैन लगाया गया है और किस एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

याचिका में यह भी कहा गया कि कई फर्जी गेमिंग ऐप्स युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे वे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी शिकार हो रहे हैं।

अगली सुनवाई में सरकारों को विस्तृत जवाब के साथ यह बताना होगा कि इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए क्या स्थायी समाधान निकाला जा रहा है।

बैकग्राउंड:

ऑनलाइन बेटिंग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है, खासकर युवाओं के बीच। कई ऐप्स दावा करते हैं कि वे "स्किल गेम्स" हैं, जबकि असल में वे जुए की श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स ने समय-समय पर इन पर चिंता जताई है।

निष्कर्ष:

हाईकोर्ट की यह सख्ती ऐसे वक्त आई है जब देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े अपराध और धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकारें इस पर क्या ठोस कदम उठाती हैं।

कोर्ट ने मांगी डिटेल रिपोर्ट:

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा:

अब तक कितने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स को बैन किया गया है?

कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं?

कार्रवाई किस एजेंसी को सौंपी गई है?

जनता को जागरूक करने के लिए क्या अभियान चल रहे हैं?

सुनवाई की अगली तारीख पर सरकारों को देना होगा जवाब।

बात सिर्फ जुए की नहीं, भरोसे की है:

ऑनलाइन गेमिंग का दायरा अब बच्चों तक पहुंच चुका है। बिना किसी रोक-टोक के प्ले स्टोर और वेबसाइट्स पर ये ऐप्स धड़ल्ले से चल रहे हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा – अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो ये समाज के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा।

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